स्वच्छ भारत अभियान के तहत खुले में शौच मुक्ति के मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ की नसीहत अफसरशाही के गले नहीं उतरी है।
हालात की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि शासन के एक जुलाई तक 101 ग्राम पंचायतों को इस बुराई से मुक्त कराने के आदेश के बावजूद आधा महीना बीतने के बाद भी मात्र दस ग्राम पंचायतें इस बुराई से मुक्त हो सकी हैं।
इन आंकड़ों के प्रकाश में आने से गुस्साए मुख्य विकास अधिकारी ने गांव पंचायत सचिवों की बैठक बुलाई और सभी को एक-एक गांव पंचायत को इस समस्या से मुक्त कराने की जिम्मेदारियां सौंप दी हैं। एक पखवाड़े का समय रह गया है और अभी भी 91 ग्राम पंचायतों में यह समस्या बनी हुई है।
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन की यह रणनीति आखिर कितनी कारगर हो पाती है।
प्रधानों की कार्यशाला 22 को
बुराई से निपटने के लिए सीडीओ ने ग्राम प्रधानों को भी अभियान में शामिल करने का निर्णय लिया है। चयनित गांव पंचायतों के प्रधानों को अभियान से जोड़ने के लिए विकास भवन में 22 जून से कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। कार्यशाला में प्रधानों को खुले में शौच से होने वाली बीमारियों, खतरों आदि की जानकारी देते हुए सहयोग मांगा जाएगा।
सीएलटीएस की टीमों की सक्रियता बढ़ी
लक्ष्य पूरा करने के लिए जिला पंचायत राज विभाग ने ग्रामीणों को खुले में शौच पर ट्रिगर (शर्मिंदा) करने के लिए तैयार की गई सीएलटीएस टीमें सक्रिय कर दी हैं। जिले के आठ ब्लाकों में सक्रिय 15 टीमों में से प्रत्येक टीम को तीन गांव को संतृप्त करने का लक्ष्य दिया गया है।
लेकिन यहां तो ग्रामीणों ने ही संभाली कमान
अलीगढ़। एक तरफ तमाम प्रयासों के बाद भी जिला पंचायत राज विभाग खुले में शौच मुक्ति कराने में कारगर साबित नहीं हो रहा है वही दूसरी ओर अकराबाद के गांव भगौसा के ग्रामीणों ने मिसाल कायम करते हुए बिना सरकारी खर्च के शौचालय निर्माण के लिए 80 गड्ड़े खोद लिए हैं और 30 पर शौचालय निर्माण शुरू कर दिया है।
शासन से एक जुलाई तक 101 गांव पंचायतों के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक दस गांव पंचायतों को खुले में शौच मुक्त करा लिया गया है। शेष गांवों को भी निर्धारित समय तक इस बुराई से मुक्त कराने का प्रयास किया जाएगा।
अनिल कुमार, डीपीआरओ