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सही निकला शक, ट्रक में अधिक माल

Fri, 16 Jun 2017 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे
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रोडवेज के स्क्रेप घोटाले में यदि ठीक तरह से जांच हो जाए तो कइयों की गर्दन फंसेगी। ट्रक में 300 किलो से अधिक स्क्रेप मिलने पर अधिकारियों ने ठेकेदार पर एक लाख से अधिक की पेनल्टी लगाकर ट्रक को छोड़ दिया। हालांकि शिकायत कर्ता का कहना है कि ट्रक को गभाना में पुन: पकड़ लिया है। 

ई-टेंडर के माध्यम से रीजनल वर्कशॉप में पड़े स्क्रेप की नीलामी गत दिनों हुई थी। अलीगढ़ के स्क्रेप को मेरठ की एक फर्म ने खरीदा था। बुधवार को फर्म के मालिक ट्रक को लेकर आए और स्क्रेप भरकर ले जाने लगे। इसी बीच नगर निगम के वार्ड 26 के पूर्व पार्षद नितिन अरोरा को सूचना मिली कि ट्रक में ज्यादा माल जा रहा है।
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वह अपने साथियों के साथ पहुंचे और ट्रक को बन्ना देवी थाने के सामने रोक लिया। सूचना मिलने पर सेल टेक्स अधिकारी तथा रोडवेज के अधिकारी भी पहुंच गए। स्क्रेप खरीदने वाले ठेकेदार ने माल से संबंधित कागजात दिखाए, लेकिन पूर्व पार्षद माल की पुन: तोल कराने की मांग पर अड़ गए।

देर रात तक कोई निर्णय न होने पर पुलिस ने ट्रक को कब्जे में ले लिया। इधर, पूरी रात रोडवेज के अधिकारी व ठेकेदार ट्रक को थाने से छुड़वाने के लिए प्रयास करते रहे, लेकिन पुलिस ने ट्रक को नहीं छोड़ा।


गुरुवार की शाम स्क्रेप खरीदने वाले ठेकेदार ने स्वीकार किया कि ट्रक में माल अधिक है। इस पर सेल टेक्स के अधिकारियों ने ठेकेदार के ऊपर तीन सौ किलो अवैध माल ले जाने के आरोप में एक लाख रुपये के करीब पेनल्टी लगाई और ट्रक को छोड़ दिया।

जबकि इस मामले में रोडवेज के किसी अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही नहीं हुई। पूर्व पार्षद ने बताया कि गभाना में ट्रक को पुलिस ने पुन: पकड़ लिया है। वह सेवा प्रबंधक समेत अन्य के खिलाफ थाने में तहरीर देने की तैयारी कर रहे हैं।


कहां थे तुलाई के वक्त अधिकारी

वर्कशॉप से स्क्रेप उठाने से पहले खाली ट्रक की तुलाई के समय छह सदस्यीय समिति मौजूद होती है। पूर्व पार्षद का कहना है कि जब खाली ट्रक को तोला गया उस समय ठेकेदार की लेबर ट्रक के अंदर थी और सेवा प्रबंधक के अलावा कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। धर्मकांटे से मिली रसीद पर भी किसी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं।


पांच हजार रूपये के चक्कर में उजागर हुआ स्क्रेप घोटाला

रोडवेज के स्क्रेप घोटाले का मामला मात्र पांच हजार रुपये के चक्कर में उजागर हो गया। सूत्रों के अनुसार स्क्रेप घोटाले में तुलाई के जिम्मेदार अधिकारियों के हिस्से में पांच-पांच हजार रुपये आने थे। एक को उसके हिस्से की रकम नहीं मिली तो उसने पूरा मामला बिगाड़ दिया।


वर्ष 2000 में भी हुई थी इस प्रकार की चोरी

ऐसा नहीं है कि ऐसा कोई पहला मामला हो। इससे पहले 19 फरवरी 2000 को भी वर्कशॉप में स्क्रेप चोरी का मामला उजागर हो चुका है। बस वह अधिक माल लेकर जाने वाला ट्रक वर्कशॉप से बाहर नहीं निकल पाया था और तत्कालीन सेवा प्रबंधक को इसकी खबर लग गई। उन्होंने इस मामले रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी।
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भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कर्मचारी संगठन भी कूदा

स्क्रेप घोटाले में जिम्मेदार अधिकारियों के विरोध में यूपी रोडवेज इम्पलाइज यूनियन के पदाधिकारी भी खड़े हो गए हैं। यूनियन के क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकुमार शर्मा व क्षेत्रीय मंत्री हरीश बाबू उपाध्याय ने कहा कि यदि घोटाले के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं हुई तो आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग को लेकर आज क्षेत्रीय प्रबंधक से एक प्रतिनिधिमंडल मिलेगा।
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