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राष्ट्रीय पोषण दिवस : कमजोरी के कारण खड़े भी नहीं हो पा रहे कुपोषित बच्चे

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नेहा। कुपोषित - फोटो : CITY OFFICE
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कौशल कुमार ओझा
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जेएन मेडिकल कॉलेज के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती अति कुपोषित बच्चों को देखकर मन कांप जाता है। कई बच्चों के हाथ-पैर बेजान नजर आते हैं तो कमजोरी के कारण कुछ खड़े हो पाने की स्थिति में भी नहीं हैं। यहां पांच साल तक के बच्चे भर्ती हैं। आंकड़ों के अनुसार जनपद में 100 में से 29 गर्भवती महिलाओं में खून की कमी है।
आज राष्ट्रीय पोषण दिवस है। जनपद में बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। सरकारी आंकड़ों पर ही गौर करें तो जनपद में 6905 अति कुपोषित एवं 24684 कुपोषित बच्चे हैं। दिसंबर 2020 में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 7042 और कुपोषित बच्चों की संख्या 20174 थी। यानी पिछले आठ महीने में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या में मामूली सुधार दर्ज किया गया है। वहीं कुपोषित बच्चों की संख्या में 4510 की वृद्धि हुई है। जेएन मेडिकल कॉलेज के एनआरसी में 10 बेड हैं और इस समय एक भी बेड खाली नहीं है। चिकित्सक डॉ. राखी मेहरोत्रा कहती हैं कि थोड़ी सी सावधानी बरत कर हम स्थिति संभाल सकते हैं। महिलाओं को पौष्टिक आहार लेना चाहिए। यह गर्भवती महिला के साथ-साथ पेट में पल रहे बच्चे के लिए भी जरूरी है। भोजन एवं नाश्ते में चना, गुड़, पालक, पत्तेदार सब्जी, फल, चुकंदर, दुग्ध उत्पाद, मांस, मछली एवं अंडा आदि शामिल करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को चिकित्सक के नियमित संपर्क में रहना चाहिए।
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केस-1
मसानी नगला मोतीबाग कॉलोनी की तीन महीने की नेहा 24 अगस्त 2021 से जेएन मेडिकल कॉलेज स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती है। जन्म के समय मां की मृत्यु हो गई। देखभाल ताई ललतेश कर रही हैं। ललतेश कहती हैं कि नेहा के पिता रवि ढकेल लगाकर गुजारा करते हैं। घर में आर्थिक तंगी रहती है। (भर्ती के समय वजन-2 किलो 230 ग्राम)
केस-2
हरदुआगंज निवासी आठ महीने के जियान की देखभाल खाला शबनम कर रही है। मां मजदूरी करती है और अभी उनकी तबियत खराब है। पिता बसरूद्दीन मजदूरी करते हैं। घर की हालत ठीक नहीं है। जियान चार भाई-बहनों में सबसे छोटा है। (भर्ती के समय वजन- 4 किलो 600 ग्राम)
केस-3
शाहपुर लोधा के दो वर्षीय आरव एनआरसी में हैं। भर्ती के समय वजन पांच किलो 950 ग्राम था। आरव शरीर से बेहद कमजोर हैं। पिता जीतू सब्जी बेचकर परिवार का गुजारा करते हैं।
केस-4
एएमयू कैंपस की 15 माह की अरुसा आठ दिन से एनआरसी में भर्ती है। मां मैराज कहती हैं कि बच्ची का गुर्दा खराब है। इमरजेंसी में 15 दिन पहले आई थी। वहां से आठ दिन पहले एनआरसी में आई है। यहां आने के बाद बच्ची की तबियत में काफी सुधार हुआ है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे कुपोषण की चपेट में ज्यादा आते हैं। महामारी एवं कोरोना कर्फ्यू के दौरान काम बंद रहने एवं अन्य वजह से लोगों का आर्थिक जीवन प्रभावित हुआ है। कुपोषण का सीधा संबंध पौष्टिक भोजन एवं जीवन स्तर से है। यहां आने के बाद बच्चे स्वस्थ होकर जाते हैं।
- डॉ. माज हाशमी, मेडिकल ऑफिसर, एनआरसी
जागरूकता व शिक्षा के अभाव में खाते-पीते परिवारों के बच्चे भी कुपोषण की चपेट में आ जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को यहां रुकने के लिए मानसिक रूप से तैयार करना पड़ता है। घर में अन्य बच्चों को छोड़कर आती है। कई तो कामकाजी होती हैं और यहां रुकना नहीं चाहती।
- कृति सिंह, स्टाफ नर्स
गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के लिए कई सरकारी योजनाएं संचालित हो रही है। कुपोषित बच्चों के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र है। गत दिनों जिलाधिकारी के साथ पोषण पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण किया था। ज्यादा से ज्यादा बच्चों को लाभ दिलाने के लिए निर्देश दिया गया है।
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- डॉ. आनंद उपाध्याय, सीएमओ
29 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में खून की कमी : डॉ. राखी
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. राखी मेहरोत्रा कहती हैं कि अलीगढ़ में 100 में से 29 गर्भवती महिलाओं में खून की कमी होती है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से भले ही कम है लेकिन गर्भवती महिला, पेट में पल रहा बच्चे, समाज एवं देश के लिए अच्छा नहीं है। यहां की 47.2 प्रतिशत सामान्य महिलाओं में भी खून की कमी है। कुपोषण का संबंध माता के स्वास्थ्य से भी है। वह कहती है कि मातृृ एवं शिशु मृत्यु दर अधिक होने का एक प्रमुख कारण खून की कमी है। खून की कमी होने से बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास नहीं होता और वह जीवन की दौड़ में पिछड़ जाते हैं। गर्भवती महिलाओं को पहले चार महीने में फोलिक एसिड जरूर लेना चाहिए। महिलाओं को अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
इस साल भर्ती बच्चों की संख्या...
जनवरी-3, फरवरी-8, मार्च-28, अप्रैल-8, मई-1, जून-12, जुलाई-21 और अगस्त -20 ।
जनपद में कुपोषण की स्थिति
अतिकुपोषित बच्चे -6905 ।
कुपोषित बच्चे - 24684 ।
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