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नरसिंहानंद के बोल : जिहादियों से बेटियों को बचाना है तो अधिक बच्चे पैदा करें

Wed, 05 Jan 2022 02:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा हजियापुर (अलीगढ़)। 

सार

गांव नूरपुर में नवनिर्मित हनुमान मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे थे महामंडलेश्वर। अनुसूचित जाति के लोगों द्वारा घर बेचने के पोस्टर लगाने के बाद चर्चा में रहा था नूरपुर।
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टप्पल के गांव नूरपुर में नरसिंहानंद गिरि महाराज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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टप्पल के गांव नूरपुर में नवनिर्मित हनुमान मंदिर का उद्घाटन करने पहुंचे महामंडलेश्वर नरसिंहानंद गिरि महाराज ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जिहादियों से हिंदू बेटियों को बचाना है तो अधिक बच्चे पैदा करें। जिन हिंदुओं ने एक-एक बच्चा पैदा करने का चलन चला रखा है उनको वह नाग-नागिन ही कहेंगे। इसी के साथ मंच पर तलवार लहराते हुए कहा कि अब यही हमारी रक्षा करेगी।

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कुछ माह पहले नूरपुर गांव में अनुसूचित जाति की बेटियों की मस्जिद के सामने से बरात न चढ़ने देने को लेकर बवाल हुआ था। मारपीट के बाद अनुसूचित जाति के लोगों ने अपने दरवाजों पर ‘मकान बिकाऊ है’ लिख दिया था। उस समय पहुंच रहे लोगों के समक्ष अनुसूचित जाति के लोगों ने गांव में तीन मस्जिद होने और एक भी मंदिर न होने की बात रखी थी। इस पर हिंदू एकता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरएस बाली ने सहयोग कर नूरपुर में हनुमान मंदिर का निर्माण करवाया। मंगलवार को मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में कई प्रांतों से लोग शामिल हुए। 

नूरपुर का नाम हनुमानगढ़  करने की मांग
हनुमान मंदिर का उद्घाटन करने के बाद महामंडलेश्वर नरसिंहानंद गिरी महाराज और हिंदू एकता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरएस बाली ने मंच से नूरपुर का नाम बदलकर हनुमानगढ़ कराने की मांग उठाई। कहा कि जल्द ही शासन-प्रशासन से मिलकर नूरपुर का नाम हनुमानगढ़ किए जाने की मांग बुलंद करेंगे। इस मौके पर संध्या सिंह, राजवीर हिंदू, भाजपा नेता पंकज पंडित, छात्र नेता आदित्य पंडित, गणेश हिंदू, मनोज हिंदू, गोविंद चौधरी, सचिन पंडित, किशन शर्मा, सत्यप्रकाश तोमर, दिनेश शर्मा, प्रवीन पांचाल आदि मौजूद रहे।
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नूरपुर में हुई रामराज्य की शुरुआत 
नूरपुर की अनुसूचित जाति की महिलाओं ने कहा कि आज उनके गांव में रामराज्य की शुरुआत हुई है। गांव में मंदिर न होने से उन्होंने व्रत रखना भी छोड़ दिया था। कुछ महिलाओं का कहना था कि मंदिर न होने से गायों के खूंटे को ही पवित्र मानकर वह अर्घ्य दिया करतीं थीं, अथवा दो किलोमीटर पैदल चलकर टप्पल के मंदिर में दर्शन करने जाती थीं। उद्घाटन कार्यक्रम दौरान लगातार चार घंटे तक जय श्रीराम और वंदे मातरम् का उद्घोष गुंजायमान रहा। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी मंच से प्रस्तुत किए गए।

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