अलीगढ़ के बाजार में सरसों के तेल की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। पिछले एक सप्ताह में प्रति किलो 10 रुपये का इजाफा दर्ज किया गया है। इस बढ़ोतरी के बाद थोक बाजार में दाम 160 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। यह मूल्य वृद्धि आम उपभोक्ताओं की रसोई के बजट को प्रभावित कर रही है।
पहले सरसों का तेल 150 रुपये प्रति किलो बिक रहा था। अब इसका दाम बढ़कर 160 रुपये प्रति किलो हो गया है। महानगर में सरसों के तेल की खपत प्रतिदिन 100 क्विंटल से अधिक है। स्वर्ण जयंती नगर के खुदरा दुकानदार आकाश ननवानी ने कीमतों में वृद्धि की पुष्टि की है। महावीरगंज के थोक दुकानदार मुकुल वार्ष्णेय ने भी यही जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वृद्धि से घर के बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। मुकुल वार्ष्णेय ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में दाम और बढ़ सकते हैं।
मूल्य वृद्धि के प्रमुख कारण
तेल की कीमतों में इजाफे के कई प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। ट्रांसपोर्ट भाड़े में बढ़ोतरी इसका एक मुख्य कारण है। साथ ही, सरसों की कम पैदावार भी महंगाई का बड़ा कारण है। बाजार में सरसों के तेल की मांग में लगातार वृद्धि हुई है। वहीं, पीछे से तेल की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पा रही है। मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन से दाम बढ़ रहे हैं।
उपभोक्ताओं पर सीधा प्रभाव
सरसों तेल की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को प्रभावित कर रही हैं। रसोई के आवश्यक सामानों में यह एक महत्वपूर्ण वस्तु है। तेल महंगा होने से अन्य खाद्य पदार्थों की लागत भी बढ़ सकती है। गृहिणियों को अब अपने मासिक बजट में कटौती करनी पड़ रही है।