यहां के कारखानों में पीतल की मूर्तियां 50 रुपये से लेकर 80 हजार तक की बनाई जा रही हैं। इन्हें बेहद ही आकर्षक रूप से तैयार किया जा रहा है। कारोबारियों का कहना है कि छोटी मूर्तियां की मांग ज्यादा होती है। छोटी मूर्ति 50 रुपये 150, 250 और 500 तक की बन रही हैं। मूर्तियों की सबसे ज्यादा मांग मध्यप्रदेश, बिहार और राजस्थान से है। यहां के कारोबारियों का कहना है कि कुछ जगहों पर अभी से मूर्तियों की सप्लाई की जाने लगीं हैं।
पिछले साल हुआ था 70 करोड़ का कारोबार
ताले के लिए तो अलीगढ़ मशहूर है ही मूर्तियों के लिए भी यहां की पहचान है। पिछले साल अलीगढ़ में मूर्ति कारोबार 70 करोड़ के करीब था लेकिन इस बार बढ़कर 100 करोड़ पहुंचने का अनुमान है। निर्यातक सुशील मित्तल का कहना है कि पीतल के रेट तो बढ़ रहे हैं लेकिन मूर्ति की मांग भी खूब है। दिवाली पर हर कोई अपने घर में भगवान की मूर्ति लाना चाहता है।
तीन साल से लगातार बढ़ रहे पीतल के दाम
- 2019 में 310 रुपये किलो
- 2020 में 310 रुपये किलो
- 2021 में 460 रुपये किलो
- 2022 में 485 रुपये किलो
- 2023 में 495 रुपये किलो
- 2024 में 525 रुपये किलो
देश में मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु में अलीगढ़ की बनी मूर्तियों की आपूर्ति होती है। विदेश में अमेरिका, आस्ट्रेलिया, सिंगापुर, इंग्लैंड में इनकी मांग सर्वाधिक है। जहां पर आपूर्ति भेजी जा रही है।
इन मूर्तियों की मांग होती है
गणेश-लक्ष्मी, दुर्गा जी, श्रीराम परिवार, हनुमान जी, कुबेर जी, श्रीयंत्र, दीपक, सजावट का सामान, मंदिर, सिंहासन, घंटी और सजावटी सामान।
कारोबारियों की मांग
- मूर्ति निर्माता हस्तशिल्पियों के लिए एक डिस्प्ले सेंटर बने। जहां पर इनकी प्रदर्शनी मुफ्त हो सके।
- मूर्ति की ढलाई करने वाले परंपरागत तरीकों को बदल कर आधुनिक मशीनों से यह काम हो।
- कुशल कारीगरों की कमी को दूर करने के लिए युवाओं को इसका प्रशिक्षण दिया जाए।