गांव बिलौना निवासी महिला और उसके नवजात की 100 शैयायुक्त संयुक्त चिकित्सालय में हालत बिगड़ गई। 27 जनवरी को नवजात की निजी अस्पताल और 2 फरवरी को प्रसूता की जेएन मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। परिजन ने प्रसव कराने के नाम पर अवैध वसूली और इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए उच्चाधिकारियों से शिकायत की है।
गांव शेखूपुर निवासी शिशुपाल सिंह ने की गई शिकायत में बताया कि उनकी बेटी काजल की शादी गांव बिलौना में हुई थी। 24 जनवरी को बेटी को प्रसव के लिए अतरौली के 100 शैया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने बेटे को जन्म दिया। प्रसव कक्ष में मौजूद कर्मियों ने खुशी की बात कहते हुए ढाई हजार रुपये भी लिए, लेकिन उसी दिन कुछ देर बाद नवजात की हालत बिगड़ने लगी।
परिजन की शिकायत पर नवजात को जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन अस्पताल के स्टाफ ने गुमराह करते हुए अतरौली के ही एक निजी अस्पताल में भेज दिया, जहां बच्चा दो दिन भर्ती रहा। परिजन को बच्चे से मिलने नहीं दिया गया। वहां हालत और बिगड़ने पर अलीगढ़ भेज दिया गया, जहां 27 जनवरी को उसकी मौत हो गई।
नवजात बेटे की मौत से उनकी बेटी काजल की भी हालत बिगड़ने लगी। आशा कार्यकर्ता के कहने पर उसे एक निजी अस्पताल ले गए लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। रविवार को उसे जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां सोमवार को काजल की भी मौत हो गई। मां-बेटे की मौत से परिवार में मातम छाया है।
इस तरह की शिकायत उन्हें नहीं मिली है। फिर भी इसकी जांच कराई जाएगी, जो दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। -डॉ. दुर्गेश कुमार सीएमएस संयुक्त चिकित्सालय, अतरौली