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अलीगढ़ : छतों पर बंदर, गलियों में कुत्ते, सड़कों पर सांड़...जनता बेहाल

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देहली गेट चौराहे पर छुट्टा गोवंश। - फोटो : CITY OFFICE
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महानगर में आवारा जानवरों के खौफ से लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। छतों पर बंदर धमाचौकड़ी मचाते रहते हैं, जबकि गलियों में आवारा कुत्तों की दहशत है। वहीं, सड़कों पर आवारा गोवंश का खौफ है। सांड़ों के हमले से लोग घायल हो रहे हैं। जिले में बीस हजार से अधिक लोग हर साल कुत्ते एवं बंदरों के शिकार बनते हैं।
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कुछ रोज पहले केशवनगर में शांति निकेतन वर्ल्ड स्कूल की प्रधानाचार्य कृष्णा सिंह पर सांड़ ने अचानक हमला कर दिया। वह बाल-बाल बची थीं। बड़ी मुश्किल से सांड़ को काबू में किया गया था। आसपास के लोगों के मुताबिक, सांड़ अब तक सौ से अधिक लोगों को घायल कर चुका था। संगम विहार के दिनेश गुप्ता की रीढ़ की हड्डी टूट गई थी। दुर्गाबाड़ी में कुत्तों ने एक बंदर को मार दिया था। देखते-देखते वहां पर दो सौ से अधिक बंदर पहुंच गए। दहशत में लोग घरों में कैद हो गए थे।
व्यस्त बाजारों में जाम का भी कारण बनते हैं
महानगर के किसी भी क्षेत्र में चले जाएं, आवारा पशुओं एवं कुत्तों का आतंक है। कई बार तो बीच सड़क पर सांड़ लड़ते नजर आ जाते हैं। व्यस्त बाजारों में इन जानवरों की वजह से जाम की स्थिति बन जाती है। कई बार सांड़ हिंसक हो उठते हैं और राहगीरों को पटक देते है। धनीपुर मंडी में तो आवारा जानवरों की वजह से चलना मुश्किल है। एटा चुंगी क्षेत्र में भी काफी संख्या में पशु नजर आते हैं। इनकी वजह से दुर्घटनाएं भी होती हैं। गली-मोहल्लों में कुत्तों का आतंक है। बाइक सवार को दौड़ा लेते हैं। इसकी वजह से दुर्घटनाएं होती हैं। ये कुत्ते राह चलते लोगों को काट कर भाग जाते हैं। बंदर तो हाथ से फल एवं खाने-पीने के थैले छीनकर भाग जाते हैं। घर की छतों पर धमाचौकड़ी मचाते हैं। बालकनी एवं रसोई घर में भी पहुंच जाते हैं।
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- केशवनगर निवासी शांति निकेतन वर्ल्ड स्कूल की प्रधानाचार्य कृष्णा सिंह बाल-बाल बची थीं। संगम विहार के दिनेश गुप्ता की रीढ़ की हड्डी टूट गई। कई क्षेत्र में सांड़ एवं कुत्तों का आतंक है। आए दिन लोग दुर्घटना के शिकार होते हैं। नगर निगम के अधिकारी गंभीर नहीं हैं। पार्षदों को साथ लेकर अधिकारियों से इस संबंध में बातचीत करेंगे।
- डॉ. मुकेश शर्मा, उप सभापति नगर निगम
- जयगंज में बंदरों का आतंक है। कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। रसोई घर से खाने का सामान उठाकर ले जाते हैं। पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं। कपड़े फाड़ देते हैं। क्षेत्र के लोग बंदरों से आतंकित रहते हैं। घुड़की की वजह से दुर्घटनाएं होने की आशंका रहती है। इस समस्या का समाधान होना चाहिए।
- डॉ. रजत सक्सेना, निवासी जयगंज
- कुत्ता व बंदर काटने के मामले काफी आते हैं। 24 घंटे में 10-15 मामले तो आ ही जाते हैं। बंदरों से ज्यादा कुत्ते काटने के मामले आते हैं। सांड़ या पशुओं की वजह से दुर्घटनाएं होती हैं और गंभीर हालत में लोग उपचार के लिए आते हैं। हाइड्रोफोबिया के मरीज भी आते हैं, जिन्हें आगरा रेफर किया जाता है।
- बीपी सिंह, फार्मेसिस्ट, मलखान सिंह जिला चिकित्सालय
- मलखान सिंह जिला चिकित्सालय में औसतन 80-100 लोग इलाज या एआरवी लगवाने आते हैं। हम लोग जंगल काटकर घर बना रहे हैं। आखिर बंदर जाएंगे कहां? सांड़ एवं गाय को लोग सड़कों पर छोड़ देते हैं। समस्या का समाधान सबके सहयोग से होगा।
- डॉ. राजेंद्र बंसल, चिकित्सक, मलखान सिंह जिला चिकित्सालय
- गाजियाबाद में कुत्तों की नसबंदी के लिए टेंडर कर दिया गया है। हमलोग भी इसी फार्मूले को अपनाएंगे ताकि कुत्तों की बढ़ती संख्या पर रोक लगाई जा सके। कुत्तों की नसबंदी कर उनके स्थान पर छोड़ आएंगे। नगर निगम में अब पशु चिकित्सा अधिकारी आ गए हैं। बेसहारा पशुओं एवं बंदरों को भी नियंत्रित करने का प्रयास किया जाएगा।
- अरुण कुमार गुप्त, अपर नगर आयुक्त
गोशालाओं में क्षमता से अधिक गोवंश
नगर निगम की दो गोशाला है, जिसमें क्षमता से अधिक गोवंश हैं। बरौला बाईपास स्थित गोशाला की क्षमता 200 है। आगरा रोड स्थित कान्हा गोशाला की क्षमता 300 है। वर्तमान में गोशाला में 750 से अधिक गोवंश हैं।
बंदर छोड़ने गए ठेकेदार की ग्रामीण कर चुके हैं पिटाई
नगर निगम द्वारा कुछ माह पूर्व बंदरों को पकड़ने के लिए एक एजेंसी को ठेका दिया गया था। ठेकेदार शहर के बंदरों को पकड़कर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में छोड़ आता था। गभाना क्षेत्र में रात में बंदर छोड़ते हुए ठेकेदार को ग्रामीणों ने पकड़ लिया और पिटाई कर दी। ठेकेदार काम छोड़कर चला गया। नगर निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश कुमार कहते हैं कि एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर का विकास जरूरी है। डॉ. राजेश ने कहा कि कान्हा गोशाला की क्षमता बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।

अचलताल पर बंदरों का झुंड।- फोटो : CITY OFFICE

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