बाजार में मिलावटी खाद्य पदार्थों की भरमार है। सबसे अधिक मिलावटखोरी मसालों में हो रही है। बीते दो वर्ष में 65 में से 43 सैंपल फेल हो गए। खाद्य सुरक्षा विभाग भी इस रिपोर्ट को देखकर दंग है। इसके बाद विभाग ने बीते 15 दिन में मसाला विक्रेेताओं के खिलाफ अभियान छेड़ दिया, जिसमें 115 किलोग्राम मसाले सीज किए गए हैं। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं में मिलावटखोरी सबसे अधिक है। दूध, मसाले, मिठाई, नमक, तेल, रिफ ाइंड जैसी वस्तुएं शामिल हैं, जिनका उपयोग हर घर में सुबह शाम होता है।
जिला अभिहित अधिकारी सर्वेश कुमार मिश्रा ने बताया कि दूध, मसाले, मिठाई, नमक, तेल, रिफ ाइंड आदि खाद्य पदार्थों के 2219-20 और 2020-21 में 1077 नमूने भरे गए। इनमें से 2019-20 में 556 की रिपोर्ट प्राप्त हुई, जिनमें 232 नमूने मानकों के विपरीत, 55 नमूने असुरक्षित और 22 फेल पाए गए। वहीं, 2020-21 में 366 सैंपल भरे गए। इनमें मानकों के विपरीत 98, असुरक्षित 68 और 13 नमूने फेल पाए गए। इनके अलावा मसालों के 65 में से 43 सैंपल फेल हुए। इस पर विभाग ने मिलावटखोरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। असुरक्षित पाए गए सैंपलों को अधिक गंभीर श्रेणी और मानव जीवन की सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक पाए जाने पर इन केसों को क्रिमिनल कोर्ट में दाखिल किया गया है। इन मामलों में छह माह से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। अधोमानक या मानकों के विपरीत मिले खाद्य मामलों को एडीएम सिटी कोर्ट में दर्ज कराया जाता है।
मिलावट से बचें, 9454468623 पर शिकायत करें
अभिहित अधिकारी सर्वेश कुमार मिश्रा ने बताया कि अगर पैक्ड या खुले सामान में मिलावट या नकली होने का शक हो तो तत्काल फ ोन नंबर 9454468623 पर शिकायत दर्ज कराएं। टीम मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करेगी। विभाग की ओर से मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान जारी है। आशंका होने पर सैंपल भरे जाते हैं। जांच लखनऊ स्थित लैब में होती है। लैब से आने वाली जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाती है।
मिलावटी मसालों से है कैंसर का खतरा
जीटी रोड स्थित ओम हॉस्पिटल के संचालक डा. जितेंद्रवीर सिंह के मुताबिक नकली मिलावटी मसालों के खाने से किडनी व लीवर संबंधित बीमारियों का खतरा हो जाता है। नकली मसालों में रंग मिलाया जाता है, जिसमें रसायन होते हैं। इनको लंबे समय तक खाने से लीवर कैंसर भी हो सकता है। इसके अलावा फू ड प्वाइजनिंग होना आम बात है।