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अलीगढ़ः कैनवस पर कल्पना के रंग भरकर कमा रहे लाखों 

Fri, 15 Apr 2022 01:23 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, इकराम वारिस, अलीगढ़।
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ताला व तालीम की नगरी अब कला जगत में भी ख्याति हासिल कर रही है। कैनवस पर यहां के कलाकार ऐसे रंग बिखेर रहे हैं कि कद्रदान उनकी कला को हाथोंहाथ ले रहे हैं। शौक-शौक में कूची थामने वाले आज हजारों-लाखों रुपये कमा रहे हैं।
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आज विश्व कला दिवस है। कूची और रंग की जुगलबंदी से जिले के संदीप सिंह (दिल्ली में खुद की आर्ट गैलरी), नीतू सिंह, विष्णु कुमार, रवि कुमार, जितेंद्र, तनु, विजय, अजय, ममता, शिवाशीष आदि शोहरत कमा रहे हैं और कमाई भी कर रहे हैं। वह रोजाना कल्पनाओं के रंग से कला का सृजन कर रहे हैं।




इनके अलावा, कई कला के स्कूल चला रहे हैं तो कई कला के शिक्षक हैं। ये सभी कैनवस पर रंग भरने के साथ ही विद्यार्थियों को इसकी बारीकियां भी सिखा रहे हैं। कला विशेषज्ञ डॉ. सुनीता गुप्ता ने बताया कि कला विषय रोजगार परक है। यदि ईमानदारी से इस क्षेत्र में काम करें तो एक लाख से 10 लाख रुपये महीने तक कमा सकते हैं। बीएफए के बाद आरंभ में ही पांच से छह लाख रुपये के पैकेज की नौकरी मिलती है। उन्होंने कहा कि कला के क्षेत्र में वही आगे बढ़ सकता है, जिनमें कल्पनाशीलता, मेहनत, सौंदर्यपरक, विचारशीलता, सृजनात्मकता है।
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यहां कर सकते हैं कला की पढ़ाई 
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, धर्म समाज महाविद्यालय, श्री वार्ष्णेय महाविद्यालय, टीकाराम कन्या महाविद्यालय, इंदिरा कला केंद्र आदि।


कला मानव को मानव बनाने में सहायक है। व्यक्ति में संवेदनशीलता पैदा होती है। संस्कार पैदा होते हैं। कलाकार भी अपनी संस्कृति को बचाने में सहायक भूमिका निभाता है। समाज में उत्पन्न विकृति दूर करने में कलाकार सहायक है। इतिहास को संजोने में कला अपना योगदान दे दी है। हमें अपने पूर्व के इतिहास की जानकारी प्राप्त करनी है, तो केवल कला ही ऐसा मार्ग है, जो अपने पूर्व के इतिहास की जानकारी प्राप्त करने में सहायक है। अपने पुराने इतिहास के विषय में बताती है।
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- डॉ. सुनीता गुप्ता, कला विशेषज्ञ।
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