स्पेशल ट्रेन से गुजरात से लौटे श्रमिकों की बेबसी का सच मंगलवार को सामने आया। जंक्शन पर ट्रेन से उतरते मजदूरों के हाथों में अपने बच्चों का हाथ था। सिर पर कपड़ों का बोझा। मगर, इस बोझे से ज्यादा भारी उनका मन था, जो हर पल यह सोच रहा था कि अब परिवार को खाना कैसे खिलाएंगे। क्या अपने शहर में कोई काम मिलेगा। अगर, काम नहीं मिला तो परिवार भूखो मर जाएगा। हाड़तोड़ मेहनत कर परदेश में जो भी कमाया था, वह सब तो लॉक डाउन में परदेश में जिंदा रहने की खातिर गंवा दिया। अब जेब खाली है। सालों पहले घर-गांव छोड़ा था। पता नहीं कोई पड़ोसी, ग्राम प्रधान या अधिकारी मदद करेंगे या फिर प्रवासी समझकर अपने हाल पर मरने के लिए छोड़ देंगे। एक दर्द भरी दास्तां एक दो नहीं बल्कि उन हजारों श्रमिकों की है, जिनका बाहरी प्रदेशों से घर लौटना जारी है।
छह साल से गुजरात के सिंदूर में स्थित एक ईंट भट्टे पर काम कर रहे हैं। परिवार के छह लोग भी साथ रहते हैं। लॉक डाउन होते ही रोजगार बंद हो गया। छह साल में जो कुछ एकत्रित किया था, वह किराए से लेकर दो माह तक बैठकर खाने-पीने में खर्च हो गया। घर लौटकर आने पर सिर्फ जेब में 1500 रुपये हैं। समझ नहीं आ रहा इन पैसों से अब कब तक जीवन कटेगा।
- अशोक कुमार, मडराक, अलीगढ़
गोधरा में मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हुए एक साल हो गया। लॉक डाउन में पूरी जमा पूंजी खर्च हो गई। अब तो इतना भी पैसा नहीं है कि बच्चों को दो वक्त का खाना खिला दें। मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या अपने घर लौटकर रोजगार मिल पाएगा। अधिकारी-नेता हमारी मदद को आगे आएंगे या नहीं। अगर, मदद न मिली तो हमारे जैसे हजारों परिवार भूखे मर जाएंगे।
- गंगचरण, अतरौली, अलीगढ़
गुजरात से अलीगढ़ के 204 सहित प्रदेश के 790 श्रमिक स्पेशल ट्रेन से लौटे
कोरोना महामारी के चलते लागू देशव्यापी लॉक डाउन में गुजरात में फंसे उत्तर प्रदेश के श्रमिकों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। मंगलवार को गुजरात के दाहोद से आई श्रमिक स्पेशल ट्रेन से 790 यात्री वापस आए। इनमें से 204 अलीगढ़ के शामिल रहे। सभी को रोडवेज बसों से उनके गंतव्यों तक भेजा गया। इधर, कोरोना जैसी महामारी को लेकर सरकार एक ओर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए श्रमिकों को ट्रेन में सीट का आवंटन कर रवाना कर रही है। मगर, जंक्शन पर उतरते ही व्यवस्था में लगे सरकारी अमले की लापरवाही के चलते यहां सोशल डिस्टेंसिंग की व्यवस्था फेल हो गई। थर्मल स्क्त्रस्ीनिंग के नाम पर भी सिर्फ खाना पूर्ति ही हो सकी।
जिलाधिकारी ने मुताबिक 790 श्रमिकों में से 204 अलीगढ़ के थे, इनको आईटीएम कालेज में भेजा गया। वहां थर्मल स्क्त्रस्ीनिंग होने के बाद घरों को रवाना किया गया है। इसके साथ ही अन्य श्रमिक जो कि हाथरस, मेरठ, एटा, कासगंज, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, बदायूं, बुलंदशहर, संभल आदि जिलों के थे, उक्त सभी को रोडवेज बसों द्वारा उनके जिलों में भेजा गया। सभी को खाना और पानी भी उपलब्ध कराया गया।