कोरोना काल में आई दूसरी लहर के दौरान जिला प्रशासन की ओर से गांव-गांव में वितरित कराई मेडिकल किट में घालमेल की बात सामने आई है। लाभार्थियों के मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर कई मामलों में यह सच्चाई सामने आई है कि लोगों को किट वितरण नहीं की गई है, जबकि उनका ब्यौरा रजिस्टर में दर्ज कर लिया गया। इसको लेकर डीएम ने जांच बैठा दी है। साथ ही जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षकों से स्पष्टीकरण तलब किया है।
कोरोना काल में दूसरी लहर जिले में मार्च के अंत से मई माह के मध्य तक पीक पर रही। प्रतिदिन औसतन 200 से अधिक कोरोना संक्रमित सामने आए। देहात क्षेत्र में संक्रमितों की संख्या अधिक रही। इसको देखते हुए डीएम ने आशाओं के माध्यम से घर-घर थर्मल स्कैनर के जरिए स्क्रीनिंग कराई। साथ ही कोरोना के समरूप लक्षण वाले संदिग्ध मरीजों को मेडिकल किट का वितरण कराया। इस किट में कोरोना के उपचार के दौरान दी जाने वाली दवाएं शामिल थीं। दूसरी लहर के दौरान करीब 50 हजार किट जिले भर में वितरित की गईं।
कोरोना कंट्रोल रूम से हुए सत्यापन में सामने आया है कि आशाओं द्वारा जिन लोगों को किट वितरित नहीं की गई उनका नाम, पता, मोबाइल नंबर सहित पूरा ब्यौरा रजिस्टर में दर्ज किया गया। आशाओं ने भारी संख्या में ऐसे लोगों के नाम रजिस्टर में दर्ज किए हैं। रजिस्टर में अंकित मोबाइल नंबरों पर फोन करने के बाद कोरोना कंट्रोल रूम द्वारा इस घालमेल को उजागर किया गया है। डीएम के सामने पूरी रिपोर्ट पेश की गई। इसके आधार पर उन्होंने मामले में जांच बैठा दी है। डीएम चंद्रभूषण सिंह के मुताबिक जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षकों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। इस मामले में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन पर कड़ी कार्रवाई होगी।