फोड़ा पकाने के लिए सिंदूर को घी के साथ लगाते हैं और पान का पत्ता बांधते हैं। इससे घाव पक कर साफ हो जाता है। खुजली होने पर काली मिर्च और मक्खन के साथ सिंदूर लगने से बीमारी दूर होती है। इससे कई दवाएं भी बनाई जाती हैं।
असली सिंदूर की पहचान
पानी के साथ मिला कर हथेली पर रगड़ने पर असल सिंदूर के कण चिपके रह जाते हैं। नकली पूरा साफ हो जाता है। असल सिंदूर को लगाने पर जलन नहीं होती है। नकली में जलन होती है। नारंगी और गुलाबी रंग का सिंदूर प्राकृतिक रूप से बनाया जाता है, लाल रंग का सिंदूर कृत्रिम होता है।
सिंदूर दो तरह से बनता है
1-रेड आक्साइड लेड
2-रेड आक्साइड मरकरी
सूखे सिंदूर की कीमत थोक बाजार में लगभग 300 रुपये किलो है। इसे कुछ बीमारियों में दवा के तौर पर प्रयोग किया जाता है। सुहागिनें इसका धार्मिक महत्व मान कर प्रयोग करती हैं। सिंदूर और कुमकुम दोनों अलग अलग हैं। -गोपालशरण गर्ग, राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता वैद्य
विवाह के बाद से लगातार सूखे सिंदूर का ही प्रयोग किया। कुछ मान्यताओं के लिए फैशन को बीच में लाना सही नहीं है। -सुमित्रा देवी, विजयगढ़