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Karwa chauth: सुहागिनें साल दर साल दूर हो रहीं असल सिंदूर से, महिलाएं मांग में भर रही हैं अब यह

Tue, 31 Oct 2023 06:56 PM IST
चमन शर्मा आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

सुहागिनों के श्रृंगार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सिंदूर उनसे दूर होता जा रहा है। साल दर साल इसका प्रयोग कम हो रहा है। असल सिंदूर की जगह फैशनेबुल लिक्विड सिंदूर लगाया जा रहा है, जबकि धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत और पूजा पाठ में केवल सूखा सिंदूर ही प्रयोग किया जाना चाहिए।
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पारंपरिक सूखा सिंदूर मांग में भरती भूमिका उर्फ दीक्षा - फोटो : स्वयं
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विस्तार
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करवाचौथ पर ब्यूटी पार्लरों से घरों तक सजने संवरने वाली सुहागिनों में बेहतर दिखने की होड़ है। सब तैयारी कर रही हैं। 500 से लेकर 2000 रुपये तक खर्च हो रहे हैं। कुछ महिलाएं इससे भी महंगा श्रृंगार करा रहीं हैं, लेकिन सुहागिनों के श्रृंगार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सिंदूर इनसे दूर होता जा रहा है। साल दर साल इसका प्रयोग कम हो रहा है। असल सिंदूर की जगह फैशनेबुल लिक्विड सिंदूर लगाया जा रहा है, जबकि धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत और पूजा पाठ में केवल सूखा सिंदूर ही प्रयोग किया जाना चाहिए।

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वैदिक परंपरा से विवाह कराने वाले खैर के पंडित योगेश शर्मा कहते हैं कि विवाह के दौरान सात फेरों के बाद सूखे सिंदूर से ही मांग भरी जाती है। वही सही है, लिक्विड सिंदूर का प्रयोग नहीं होता है। पूजा, पाठ और व्रत में सूखा सिंदूर ही प्रयोग करना चाहिए। सुहागिनें अनामिका अंगुली से सूखा सिंदूर मांग में भरतीं हैं। इसे लगाने से उनके मंगल ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और तनाव दूर होता है। यह सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है। सुहागिनें ताउम्र सिंदूर लगाती है। धन-संपत्ति, सौभाग्य, संतान, वंश-वृद्धि और पति की लंबी आयु के लिए इसे मांग में भरा जाता है। इसे लगाने के बाद ही सुहागिन को घर की लक्ष्मी का दर्जा मिलता है। पूर्व में सुहागिन सूखे सिंदूर की ही बिंदी लगाती थीं, अब उसे यदाकदा ही देखा जाता है।

धार्मिक मान्यता
माता जानकी प्रभु राम की आयु की कामना के लिए सिंदूर लगाती थीं। उन्हीं को देखकर हनुमान जी ने सिंदूर लगाना शुरू किया। मंदिरों में हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाया जाता है। इसलिए पति की आयु की कामना के लिए सिंदूर का प्रयोग होता है। विश्व प्रसिद्ध कामाख्या शक्तिपीठ के साथ सभी मंदिरों में सिंदूर का प्रयोग सभी पूजा पाठ में होता है।

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आयुर्वेदिक महत्व

फोड़ा पकाने के लिए सिंदूर को घी के साथ लगाते हैं और पान का पत्ता बांधते हैं। इससे घाव पक कर साफ हो जाता है। खुजली होने पर काली मिर्च और मक्खन के साथ सिंदूर लगने से बीमारी दूर होती है। इससे कई दवाएं भी बनाई जाती हैं।

असली सिंदूर की पहचान
पानी के साथ मिला कर हथेली पर रगड़ने पर असल सिंदूर के कण चिपके रह जाते हैं। नकली पूरा साफ हो जाता है। असल सिंदूर को लगाने पर जलन नहीं होती है। नकली में जलन होती है। नारंगी और गुलाबी रंग का सिंदूर प्राकृतिक रूप से बनाया जाता है, लाल रंग का सिंदूर कृत्रिम होता है।

सिंदूर दो तरह से बनता है
1-रेड आक्साइड लेड
2-रेड आक्साइड मरकरी
सूखे सिंदूर की कीमत थोक बाजार में लगभग 300 रुपये किलो है। इसे कुछ बीमारियों में दवा के तौर पर प्रयोग किया जाता है। सुहागिनें इसका धार्मिक महत्व मान कर प्रयोग करती हैं। सिंदूर और कुमकुम दोनों अलग अलग हैं। -गोपालशरण गर्ग, राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता वैद्य
विवाह के बाद से लगातार सूखे सिंदूर का ही प्रयोग किया। कुछ मान्यताओं के लिए फैशन को बीच में लाना सही नहीं है। -सुमित्रा देवी, विजयगढ़
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