गांव खेड़ा में कपड़े सिलने में जुटीं समूह की महिलाएं। संवाद
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तहसील के गांव खेड़ा निवासी ज्ञानवती देवी बेहद साधारण परिवार से हैं। परिवार में पति और दो बच्चों सहित कुल चार सदस्य हैं। खेती या पशुपालन न होने के कारण पति मजदूरी करते हैं, ऐसे में घर के खर्च में हाथ बंटाने के लिए ज्ञानवती आगे बढ़ीं और पति बालकिशन का बखूबी साथ निभाया। अब वे अन्य महिलाओं के साथ रेडीमेड गारमेंट और आचार बनाकर हर महीने 10 से 12 हजार रुपये कमा रही हैं। उन्होंने छह अन्य महिलाओं को भी रोजगार दिया है।
ज्ञानवती ने बताया कि वर्ष 2019 में उन्हें पता चला कि ब्लाॅक स्तर से महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बन रहे हैं और गांव की महिलाएं इनसे जुड़ रहीं हैं। वे गांव के जय विष्णु समूह में जुडीं, जिससे उनकी बचत होने लगी। दिसंबर 2020 में उन्होंने इसी समूह से 50,000 का ऋण लेकर तीन सिलाई मशीनें खरीदीं। उन्हें लोअर, टी-शर्ट सिलने के आर्डर मिलने लगे। चार महिलाएं भी जुड़ीं और काम बढ़ने लगा। जनवरी 2023 में आचार बनाने का प्रशिक्षण लिया और रेडीमेड गारमेंट के साथ-साथ आचार बनाने लगी। इस काम में दो और महिलाएं उनके साथ आईं। दोनों कामों से 10 से 12 हजार रुपये महीने की आमदनी हो जाती है। बच्चों की पढ़ाई भी ठीक से हो रही है। समूह ने उन्हें 1.5 लाख का ऋण दिया है। जो महिलाएं उनके साथ जुड़ी वे भी हर महीने चार से पांच हजार रुपये कमा रहीं हैं।
-हम चाहते हैं हर गांव में महिलाएं आत्मनिर्भर बनें। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से हम उनकी मदद करते हैं। गांव खेड़ा की ज्ञानवती इसका उदाहरण है। कई अन्य गांवों में ऐसे समूह अच्छा कार्य कर रहे हैं।
-वेदप्रकाश, बीडीओ