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महरावल हादसाः 11 सौ किमी बस चलाकर आया था ड्राइवर...तीन घंटे बाद फिर सौंप दी चाबी

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जेएन मे​डिकल कॉलेज में भर्ती संविदा बस चालक संदीप कुमार। - फोटो : CITY OFFICE
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राजा तिवारी
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परिवहन निगम यात्रियों और चालकों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है। बुद्ध विहार डिपो की रोडवेज बस (यूपी 87 टी 1994) का 18 नवंबर की रात करीब 12 बजे महरावल के पास हुए हादसे का कारण चालक से लगातार बस चलवाना है। अलीगढ़-दिल्ली-हरदोई का 1100 किलोमीटर लंबा रास्ता तय कर 18 नवंबर को जब चालक संदीप अलीगढ़ पहुंचा तो तीन घंटे बाद फिर से चाबी थमा दी गई। दिल्ली पहुंचने के बाद जब संदीप हरदोई जा रहा था तो रास्ते में बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में हरदोई की महिला की मौत हो गई, जबकि संदीप के पेट में स्टेयरिंग घुस गई थी। कई यात्री घायल हो गए थे। लापरवाही का आलम यह है कि इतने बड़े हादसे की वजह जानना परिवहन निगम के अधिकारियों ने उचित नहीं समझा।
बताते हैं कि जलाली के उकावली गांव निवासी संदीप कुमार पुत्र राशनपाल परिवहन निगम में संविदा बस चालक हैं। 32 वर्षीय संदीप 16 नवंबर की दोपहर 01 बजकर 30 मिनट पर अलीगढ़-दिल्ली-हरदोई-दिल्ली-अलीगढ़ के 1100 किमी लंबे रूट पर बस लेकर निकले। करीब 44 घंटे बाद 18 नवंबर को सुबह 9 बजकर 40 मिनट पर संदीप बस लेकर वर्कशॉप लौटे। यहां पर तीन घंटे में बस की साफ-सफाई, धुलाई, डीजल आदि पड़ पाया था कि फिर से संदीप को बस की चाबी देकर 1100 किमी लंबे अलीगढ़-दिल्ली-हरदोई-दिल्ली-अलीगढ़ रूट पर भेज दिया गया।
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संदीप वर्कशॉप से 01 बजकर 30 मिनट पर बस लेकर दिल्ली के लिए निकले। दिल्ली से देर रात हरदोई के लिए जा रहे थे कि महरावल के पास उन्हें झपकी आ गई और बस धान से लदी ट्रैक्टर ट्रॉली में जा घुसी थी। राहगीरों की सूचना पर गभाना पुलिस के साथ एंबुलेंस व पीआरवी पहुंची। यात्रियों को जिला अस्पताल लाया गया, जहां हरदोई जिले के कोंड़ा निवासी 60 वर्षीय सोनी पत्नी लल्लू को मृत घोषित कर दिया गया। पेट में स्टेयरिंग घुसने से गंभीर रूप से घायल संदीप को जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने आंतों का ऑपरेशन किया है। इस हादसे में हरदोई के गोविंद, अर्जुन, प्रशांत, सूरज, नीरज, ज्योति, हरिभान, शुभम, सौरभ, सुमन, रामगोविंद, विनोद, राममूर्ति, नागेंद्र आदि यात्री घायल हुए थे।
विभागीय कर्मचारियों के मुताबिक, संदीप से नियम विरुद्ध बस चलवाई गई, जिसकी वजह से यह हादसा हो गया। एक ड्राइवर जब 44 घंटे में 1100 किमी दूरी तय करके आया था तो उसे कम से कम दो दिन दो रात का आराम (डीडीआर) मिलना चाहिए था। थकान व नींद न पूरी होने के कारण रास्ते में संदीप को झपकी आ गई और बस हादसा हो गया। अब इसका जिम्मेदार कौन है। परिवहन अधिकारियों ने अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई करना उचित नहीं समझा है। हालांकि, परिचालक की तहरीर पर ट्रैक्टर ट्रॉली संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
ये है नियम
परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक मो. परवेज खान ने बताया कि नियमानुसार, एक दिन में 300 किमी से अधिक बस किसी भी चालक से नहीं चलवानी चाहिए। अगर रूट 300 किमी से ज्यादा लंबा है तो दो चालक बस में भेजने का प्रावधान है। यदि दिन में कोई चालक तीन सौ किमी बस चलाता है तो उसे कम से कम आठ घंटे का आराम दिया जाना आवश्यक है। अगर वह रात में इतनी ही दूरी तय करता है तो आराम का वक्त 12 से 16 घंटे का होना चाहिए।
एक चालक से अधिकतम 300 किमी बस चलवा सकते हैं। इससे अधिक बस चलवाने का प्रावधान नहीं है। अगर चालक संदीप 1100 किमी बस चलाकर आया था तो किसी भी सूरत में उसे दोबारा बस नहीं देनी चाहिए। इस प्रकरण की जांच करवाई जाएगी। तभी कुछ कहा जा सकेगा।
- मो. परवेज खान, क्षेत्रीय प्रबंधक।
बार-बार मना करने के बाद भी थमा दी बस : संदीप
अलीगढ़। जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती संदीप ने बताया कि अलीगढ़-दिल्ली-हरदोई-दिल्ली-अलीगढ़ रूट पर 1100 किमी बस चलाकर आया था। वर्कशॉप पर आराम ही कर रहा था, तभी आदेश आया कि दोबारा बस लेकर जाना है। संदीप ने बताया कि बार-बार मना करने के बावजूद बस की चाबी पकड़ाई गई और मेरी ड्यूटी चढ़ा दी गई। बस में परिचालक बदल दिया गया था, जबकि चालक बदलना चाहिए था। यहां से दिल्ली पहुंचा। देर शाम वहां से हरदोई के लिए रवाना हुआ तो सुस्ती थी। बस चला नहीं पा रहा था। हाथ, मुंह धोकर बस चलाई। लेकिन महरावल के पास झपकी आ गई। इसके बाद पता नहीं चला कि हादसा कैसे हो गया। सीधा अस्पताल में होश आया है।
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पत्नी बोली- कर्ज लेकर करा रही हूं इलाज, तीन लाख खर्च
अलीगढ़। विभागीय लापरवाही से संविदा कर्मी संदीप कुमार का परिवार सड़क पर आने की स्थिति में है। अकेले कमाने वाले संदीप के इलाज पर अब तक तीन लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। संदीप की आंतों का ऑपरेशन जेएन मेडिकल कॉलेज में हुआ है। जलाली के उकावली गांव निवासी संदीप कुमार के पिता राशनपाल मानसिक रूप से कमजोर हैं, जबकि मां उर्मिला की मौत हो चुकी है। संदीप के तीन छोटी बच्चियां हैं। परिवार के पास पौन बीघा खेत है। संदीप के ऑपरेशन में खर्च रकम पत्नी लता ने रिश्तेदारों से कर्ज के रूप में ली है। लता का कहना है कि यहां से घर जाकर पौन बीघा जमीन को बेचकर कर्ज चुकाउंगी। इसके बाद क्या होगा, भगवान जाने।
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