इन्हें किया गया सम्मानित
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विभिन्न क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्तियों का हुआ सम्मान
चिकित्सा : डॉ. संजय कुमार सिंघल
पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय सिंघल का जन्म कानपुर में स्व. कैलाश प्रसाद गुप्ता और स्व. रामकली देवी के परिवार में हुआ। वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में मरीजों के साथ अपनेपन से पेश आते हैं और सहजता के साथ उपचार करते हैं। उनका विवाह रेनू सिंघल के साथ हुआ। उनका सम्मान पुत्रवधु अंजलि अग्रवाल ने प्राप्त किया।
वयोवृद्ध : डॉ. जगदीश अग्रवाल
डॉ. जगदीश प्रसाद अग्रवाल का जन्म जिले के अंतिम छोर के गांव मराव में हुआ। निरंतर मेहनत के साथ उन्होंने शिक्षा और सामाज सेवा के क्षेत्र में जिले में अपना नाम कमाया। प्रतिष्ठित विद्यालय में प्रधानाचार्य के रूप में अपनी सेवाएं देकर नाम रोशन किया। अग्रवाल समाज को संगठित करने में अमूल्य योगदान दिया। अब भी डॉ. जगदीश समाज को संगठित करने में जुटे हैं।
शिक्षा : रचना गुप्ता
शहर के प्रतिष्ठित धर्म समाज बाल मंदिर की प्रधानाचार्य रचना गुप्ता किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। रसायन विज्ञान से एमएससी और बीएड की डिग्रीधारक रचना 18 वर्षों से शिक्षण कार्य में जुटी हैं। उन्हें 10 वर्ष का प्रशासनिक अनुभव भी है। वे कहतीं हैं कि केवल अच्छे अंक ही काफी नहीं, विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और स्वतंत्र चिंतन जगाने की जरूरत है। पति पंकज गुप्ता राधा इंटरनेशनल स्कूल इगलास के प्रधानाचार्य हैं। -
विधि : एडवोकेट नरेश चंद्र सिंघल
अलीगढ़। प्रतिष्ठित अधिवक्ता नरेश चंद्र सिंघल का जन्म 1955 में स्व. शिवलाल सिंघल के परिवार में हुआ। वर्ष 1977 में उन्होंने एएमयू से विधि की डिग्री प्राप्त की और वकालत शुरू कर दी। वर्ष 1990 में सिविल बार एसोसिएशन के महासचिव और भाजपा के महामंत्री बने। वर्ष 1995-1997 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद एएमयू के उपाध्यक्ष रहे। 1997 में सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे।
साहित्य : आरती मित्तल
कई पुस्तकें लिख चुकीं डॉ. आरती मित्तल आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। हाल ही में उन्हें भाजपा महिला मोर्चा का महानगर अध्यक्ष बनाया गया है। शिक्षा के प्रति उनकी ऐसी लगन रही कि 56 वर्ष की आयु में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। 37 वर्ष तक शिक्षिका रहने के दौरान ही मदर्स टच सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल और डायरेक्टर बनीं। आपका जन्म योगेंद्र पाल सिंह मैंगी और तृप्ता मैंगी के परिवार में हुआ। डॉ. समर्थ मित्तल से विवाह हुआ।
सांसद दामोदर अग्रवाल, डॉ पंकज दर्पण
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नाटिका के लिए तैयार होते कलाकार
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महाराजा अग्रसेन का जन्म होते मेयर संग झूमा सभागार
सभागार में अग्रलीला का मंचन देर रात शुरू हो सका। लीला में कलाकारों ने दिखाया कि महाराजा अग्रसेन का जन्म प्रताप नगर (वर्तमान राजस्थान) के सूर्यवंशी राजा वल्लभ सेन और रानी भगवती देवी के घर हुआ था। उनका जन्म होते ही नगर में उत्सव शुरू हो गया। वे भगवान राम के बड़े पुत्र कुश की 34वीं पीढ़ी में माने जाते हैं। जन्म होते महापौर प्रशांत सिंघल के साथ पूरा सभागार झूम उठा। सभी ने नृत्य किया।
मुरादाबाद से पधारे देश-विदेश में विख्यात निर्देशक डॉ. पंकज दर्पण अग्रवाल के निर्देशन में लीला का मंचन किया गया। इस प्रस्तुति का उद्देश्य अग्रकुल प्रवर्तक महाराजा अग्रसेन के जीवन-मूल्यों, आदर्शों एवं लोककल्याणकारी विचारों को जन-जन तक पहुंचाना रहा। कलाकारों ने दिखाया कि महाराजा अग्रसेन ने किस तरह से संघर्ष करते हुए समाज को नई दिशा दिखाई। एक रुपया और एक ईंट का नारा देकर समाज को आगे बढ़ाया।
रामलीला से अग्रलीला का ख्याल आया : डॉ. पंकज
अलीगढ़। डीएस कॉलेज के सभागार में अग्रलीला का भावपूर्ण मंचन करने वाले डॉ.पंकज दर्पण अग्रवाल ने बताया कि रामलीला के दो पड़ाव उनके जीवन में महत्वपूर्ण रहे-पहला अयोध्या के श्रीराम मंदिर में रामलीला का मंचन और दूसरा गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी की मौजूदगी में मंचन..। रामलीला का मंचन करते-करते विचार आया कि अग्रलीला का मंचन किया जाए। उनके आदर्श नई पीढ़ी तक पहुंचाए जाएं। इसके बाद अग्रलीला की पटकथा लिखी गई और देश भर में इसका मंचन शुरू कर दिया।
उन्होंने बताया कि अब तक अग्रलीला के देश-विदेश में 150 से अधिक मंचन हो चुके हैं। वे कहते हैं कि उन्होंने कभी इसको व्यवसाय के रूप में नहीं लिया। बचपन में रामलीला में हनुमान की सेना में वानर बनना, जीवन का टर्निंग प्वाइंट बन गया। 58 वर्षों से इस पेशे से जुड़े हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरे देश में मंचन कर चुके हैं। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति सहित 16 प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से सम्मानित हो चुके हैं। सचिन तेंदुलकर, सुनील गावस्कर, कपिल देव, अमिताभ बच्चन और माधुरी दीक्षित से सम्मान पा चुके हैं।