एडवोकेट रामप्रकाश गुप्ता। अब यह नाम दुनिया के महादानियों में शामिल हो गया है। एडवोकेट रामप्रमकाश गुप्ता की देह भले ही दुनिया छोड़ गई है, लेकिन आंखें दूसरी देह से दुनिया को देखेंगी। गांधी आई हास्पिटल के चिकित्सकों ने उनके नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की।
मानिक चौक निवासी एडवोकेट रामप्रकाश गुप्ता का रविवार सुबह सवा सात बजे निधन हो गया। वह तीन माह पहले ब्रेन हेमरेज के ऑपरेशन के बाद से बीमार चल रहे थे। उनके निधन ने परिवार को शोक में तो डुबा दिया, लेकिन परिवार ने उनके निधन और नाम को अमर कर दिया। पत्नी अंगूरी देवी ने पुत्रगण डॉ. वाई के गुप्ता प्राचार्य ज्ञान महाविद्यालय, संजीव कुमार, डॉ अनिल कुमार, डॉ. विपिन कुमार और पुत्रियों के परिवार के लोगों से पति की आंखें दान कर उनकी नजरों को दुनिया में बने रहने की इच्छा जताई।
सभी ने एक स्वर में नेत्रदान की सहमति देकर मिसाल कायम कर दी। तुरंत गांधी आई नेत्र चिकित्सालय के आई बैंक को इस संबंध में सूचना दी गई। हॉस्पिटल की चार सदस्यीय मेडिकल टीम ने घर आकर एडवोकेट रामप्रकाश गुप्ता के नेत्रों को ऑपरेशन के जरिए आई बैंक में सुरक्षित कर लिया। वहीं एडवोकेट राम प्रकाश गुप्ता के निधन से नाते रिश्तेदार, उनके जान पहचान वालों के अलावा अधिवक्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई।
सभी को निधन का दुख तो था, लेकिन इस बात की सराहना भी कर रहे थे कि एडवोकेट भले ही दुनिया को छोड़ गए हैं, लेकिन उनके परिवार के फैसले के कारण वो किसी नेत्रहीन को अपनी आंखों से ये दुनिया दिखाएंगे। वह समाज के लिए बेमिसाल उदाहरण पेश कर गए हैं। समाजसेवी राजाराम मित्र, मनोज यादव प्रबंधक ज्ञान महाविद्यालय, डॉ. ललित उपाध्याय, डॉ. हीरेश गोयल, डॉ. विवेक मिश्र उड़ान सोसाइटी के डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा, यूथ फॉर नेशन के डॉ. वैरिंदम गुणाकर, डॉ. एस एस यादव अधिवक्ता, दवा व्यवसायी और वार्ष्णेय समाज के लोगों ने घर पहुंच कर परिवार को ढांढस बंधाया।