हादसे में बिजली निगम के अधिकारियों की बड़ी लापरवाही प्रथम दृष्टया सामने आ रही है। बिना लॉग सीट के बिजली घर चल रहा था। जबकि इसी लॉग सीट पर उपभोक्ताओं को दी जाने वाली बिजली का पूरा लेखा-जोखा रहता है। साथ ही शटडाउन की पूरी प्रक्रिया होती है।
विद्युत उपकेन्द्र लोधा पर 17 दिसम्बर को लॉग सीट भर गयी थी। बिना लॉग सीट के चार दिनों से अधिकारी व कर्मचारी कार्य कर रहे थे। जबकि लॉगसीट पर हर घंटे ट्रांसफार्मर का तापमान और फीडर की रीडिंग नोट किया जाता है। लॉक सीट पर ही शटडाउन लेने की भी प्रक्रिया होती है। इसकी पूरी जिम्मेदारी जेई की होती है। जेई ने लॉग सीट विद्युत उपकेन्द्र लोधा पर नहीं मंगवायी। बिना लॉग सीट के बिजली कर्म चारी काम रहे थे। शटडाउन लॉक सीट में दर्ज होता है। अगर यह लॉग सीट होता तो हो सकता है कि यह घटना नहीं घटती? लॉकसीट नहीं होने की जानकारी मिलती ही बिजली अधिकारी उपकेंद्र की ओर दौड़ पड़े। शाम को पांच बजे नई लॉग सीट मंगाई गई। अधिशासी अभियंता कैलाश चंद्र ने बताया कि सभी बिंदुओं पर जांच कराई जा रही है।
घर में मचा कोहराम, कर्मियों में आक्रोश
लाइनमैन की मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिवार के लोग अस्पताल पहुंच गए। वहीं कर्मचारियों में इस घटना को लेकर रोष व्याप्त है। मृतक ने अपने पीछे तीन बेटे, दो बेटी व पत्नी छोड़ गए। बताया गया कि किसी भी बच्चे की अभी तक शादी नहीं हुई है। पोस्ट मार्टम हाउस में देरशाम भारी संख्या में लोग जुटे रहे।