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छोड़ आए हम वो गलियां: पुराने शहर की तंग बस्तियों से किया पलायन, कालोनियों में जा बसे 200 हिंदू परिवार

Sun, 22 Dec 2024 03:02 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

शहर के बीचोबीच स्थित मोहल्ला सराय काले खां में करीब 50 साल पहले तेली समाज के 50 से अधिक परिवार रहते थे। 1978 में शहर में दंगे भड़के थे। यह इलाका दंगों से काफी प्रभावित रहा। इस दौरान हिंदू परिवार मुस्लिम समाज के लोगों को मकान बेचकर सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर गए।
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पलायन से खाली पड़ा घर प्रतीकात्मक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कभी अलीगढ़ शहर की तंग बस्तियों में बड़ी संख्या में रहने वाले हिंदू परिवार अब धीरे धीरे पलायन करके कालोनियों में पहुंच गए है। कोतवाली क्षेत्र से अब तक करीब 200 परिवार पलायन कर चुके हैं। इन परिवारों के मकानों को मुस्लिम समाज के लोगों ने खरीदा है। इसके चलते कई इलाके हिंदू आबादी से खाली हो चुके हैं। तेली समाज की आबादी वाले सराय काले खां में अब हिंदू आबादी नहीं हैं। बाबरी मंडी से हिंदू परिवारों का पलायन जारी है। यहां से अब तक 20 हिंदू परिवार आगरा रोड और मथुरा रोड इलाकों में बस चुके हैं। 2014 के बाद से पलायन कम हुआ है।

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शहर के बीचोबीच स्थित मोहल्ला सराय काले खां में करीब 50 साल पहले तेली समाज के 50 से अधिक परिवार रहते थे। वे लोग कोल्हू चलाकर तेल का कारोबार करते थे। बताते हैं कि 1978 में शहर में दंगे भड़के थे। यह इलाका दंगों से काफी प्रभावित रहा। इस दौरान हिंदू परिवार मुस्लिम समाज के लोगों को मकान बेचकर सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर गए। इसके चलते यहां अब हिंदू परिवार नहीं हैं।

बाबरी मंडी निवासी ग्रीश चंद्र गुप्ता बताते हैं कि ये इलाके दंगों से प्रभावित रहे हैं और हिंदू परिवारों का पलायन हुआ। बाबरी मंडी से नरेश कुमार, उमेश गौड़, प्रदीप गौड़, संजय वाष्र्णेय, कालीशंकर, महेश चंद्र, गोपाल दास समेत 20 परिवार यहां से चले गए। ज्यादातर मकान मुस्लिम समाज ने खरीदे हैं। कुछ मकान बंद हैं।

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बाबरी मंडी निवासी विनय वाष्र्णेय बताते हैं कि 2014 के बाद से हिंदू परिवारों का पलायन रुका है। 2012 में संजीव शर्मा ने यहां से पलायन किया था, इनके मकान को भी मुस्लिम व्यक्ति ने खरीदा है। विनय बताते हैं कि बाबरी मंडी मोहल्ले से बाहर निकलने के लिए पांच रास्ते हैं, जिनमें पठान मोहल्ला, भुजपुरा, तुर्कमान गेट, शनीचरी पैठ मियां की सराय, पीली कोठी है। शहर में तनाव होने पर एक भी रास्ता सुरक्षित नहीं है, इस कारण लोगों ने यहां से पलायन किया है। 

मनीष गुप्ता बताते हैं कि यहां की मोची वाली गली में 50 मोची परिवार थे लेकिन अब एक भी मोची परिवार नहीं रहता। धोबी वाली गली के कुल 40 परिवारों में 20 धोबी परिवार पलायन कर चुके हैं। ठाकुर वाली गली के कुल 35 परिवारों में से 33 धोबी परिवार पलायन कर चुके हैं। इन लोगों के मकानों को मुस्लिम परिवारों ने खरीदा है।

घिरे इलाकों से खुले में पलायन कर गए 200 हिंदू परिवार
  • सराय काले खां में अब नहीं रहता कोई हिंदू परिवार
  • बाबरी मंडी में 20 हिंदू परिवारों ने बेचे अपने मकान
  • मोची वाली गली में अब कोई मोची परिवार नहीं
  • धोबी वाली गली से 20 परिवारों ने किया पलायन
  • ठाकुर वाली गली में 33 परिवारों ने मकान बेचा
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पिछले पांच साल में इन्होंने छोड़ा बाबरी मंडी

बाबरी मंडी क्षेत्र को 2022 में छोड़ दिया था। इलाके में तंग गलियां हैं। ऐसे में परिवार और कारोबार प्रभावित हो रहे थे। माहौल भी असुरक्षित बना रहता है।- बॉबी मिश्रा, आगरा रोड
असुरक्षित माहौल में रहना बहुत कठिन हो रहा था इसलिए 2021 में बाबरी मंडी क्षेत्र छोड़कर बारहद्वारी क्षेत्र में रहना शुरू किया है।- अतुल वार्ष्णेय, बारहद्वारी
बाबरी मंडी क्षेत्र दंगों से प्रभावित रहा है। ऐसे में सुरक्षा का अभाव बना रहा। बवाल होने पर पुलिस भी असहाय दिखाई देती है। 2018 में गूलर रोड पर पहुंच गए।- विवेक वार्ष्णेय , गूलर रोड
असुरक्षित माहौल के कारण परिवार और कारोबार दोनों प्रभावित हो रहे थे। इसलिए बाबरी मंडी क्षेत्र को 2020 में छोड़ दिया।- अनुज गुप्ता, मथुरा रोड

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