अतरौली के पालीमुकीमपुर के गांव कीरथपुर भागीरथपुर से बच्चे की फिरौती के लिए अपहरण के बाद हत्या के मुकदमे में दो दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा पाने वालों में एक दोषी मृत बच्चे का रिश्ते का भाई है, जिसने खुद के कर्ज को चुकाने के लिए इस घटना को अंजाम दिया। मामले में फैसला एडीजे प्रथम संजीव कुमार सिंह प्रथम की अदालत से सुनाया गया है।
यह घटना 19 अक्तूबर 2021 की है। वादी मुकदमा अमर सिंह के अनुसार घटना वाली सुबह वह परिवार के साथ खेत पर बाजरा की फसल काटने गए थे। इस दौरान उनका 11 वर्ष का बेटा अजय घर पर रह गया था। जब वह शाम को लौटे तो बेटा गायब मिला। इस दौरान पुत्रवधू से पूछा तो उसने बताया कि बाहर खेलने निकल गया था। इसके तीन दिन बाद उनके दरवाजे पर बच्चे के अपहरण व चार लाख रुपये की फिरौती की चिट्ठी मिली। इस पर पुलिस को सूचना दी गई।
बाद में पुलिस ने घटना का खुलासा किया तो सामने आया कि उसने अपने ऊपर हुए दूध व्यापार के कर्ज को पटाने के लिए अपने अपहरण का नाटक रचा था। ताकि वह अपने पिता से फिरौती मांग सके। इसी दौरान पुलिस के सामने उसने अजय के अपहरण की घटना भी स्वीकारी और बताया कि उसकी हत्या कर शव बुलंदशहर में रामघाट के पास हजारा नहर की पटरी पर छिपाई गई थी। उसके पास से मिली कापी के एक पेज पर ही उसके घर फिरौती की चिट्ठी भेजी थी। इस काम में उसके साथी दुर्गेश ने भी मदद की।
इस खुलासे पर दोनों गिरफ्तार किए और शव के कंकाल व उस पर कपड़े बरामद किए। मामले में चार्जशीट के आधार पर सत्र परीक्षण हुआ। इसी परीक्षण के दौरान साक्ष्यों व गवाही के आधार पर दोनों को उम्रकैद व 1.20 लाख-1.20 लाख रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। जिसमें से आधी राशि पीड़ित पक्ष को देने के आदेश दिए हैं।