12 अक्तूबर की शाम आस्था के घर के पास रहने वाली वादिया की सहेली मधु शर्मा को आस्था ने एक व्हाट्सएप मैसेज किया, जिसमें आस्था की ओर से लिखा था कि अरुण उसकी हत्या की योजना बना रहा है। अगर उसे कुछ हो तो उसके बच्चों को दीदी को सौंप देना। यह हत्या अरुण, उसके भाई अनुज, तरुण व मित्र अर्पित अग्रवाल ने मिलकर की है। जिसके आधार पर पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किया गया।
दौरान-ए-विवेचना मिले साक्ष्यों व मृतका के बेटे के बयानों के आधार पर अनुज व अर्पित के नाम मुकदमे से हटाए गए, जबकि अरुण-आस्था के कासिमपुर स्थित ऑक्सीजन प्लांट के नौकर विकास चौहान, दो अन्य भाड़े के आरोपी पवन, अशोक उर्फ टशन सभी निवासी साथा जवां के नाम शामिल किए गए।
इस आधार पर अरुण, विकास, पवन, अशोक उर्फ टशन को हत्या में व जेठ तरुण को साजिश में जेल भेजा गया और चार्जशीट दायर की गई।
न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान साक्ष्यों व गवाही के आधार पर जेठ तरुण व नौकर विकास को संदेह का लाभ देकर बरी किया गया है। वहीं, पति अरुण, भाड़े पर लाए गए साथी पवन व अशोक को हत्या व साजिश का दोषी करार देकर उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 1.5-1.5 लाख रुपये अर्थदंड दिया है।
ये थी पोस्टमार्टम पैनल की रिपोर्ट
शव के पोस्टमार्टम पैनल में डॉ.अनिल कुमार, डॉ.विशाखा गई, डॉ.नीरज गुप्ता व एएमयू के फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ.अफजाल हारुन शामिल थे। साथ में वीडियोग्राफी टीम भी थी। 14 अक्तूबर को हुए पोस्टमार्टम में पैनल ने पाया कि शरीर पर चेहरे, ठोड़ी, घुटने आदि पर मृत्यु पूर्व के नील के निशान थे। गला दबाकर हत्या के बाद शव लटकाया गया था। पोस्टमार्टम से एक दिन यानि 24 घंटे पहले 12 से 13 की मध्य मृत्यु होने का अनुमान जताया गया।
इस हत्याकांड में अदालत में परिस्थिति जन्य साक्ष्यों से कहानी व कड़ियों को जोड़ा गया। उसी आधार पर पति व भाड़े पर लाए गए दो साथियों को सजा सुनाई गई है। दो लोगों को बरी किया गया है, उसे लेकर अध्ययन किया जाएगा।-अमर सिंह तोमर, एडीजीसी