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Aligarh: युग की अपहरण के बाद हत्या में एक को उम्रकैद, नहीं था कोई चश्मीद, इन साक्ष्यों ने कराई सजा

Sat, 10 Aug 2024 12:57 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

13 वर्ष का युग अग्रवाल घर से बाजार सामान लेने गया था, मगर वह नहीं लौटा। इसी बीच दोपहर में हरीश अग्रवाल के फोन पर एक अंजान नंबर से कॉल आई और बेटे की सलामती के लिए दस लाख रुपये की फिरौती मांगी। इस पर परिजन थाने पहुंचे और मुकदमा दर्ज कराया। रात एक बजे पुलिस ने युग का शव गभाना क्षेत्र में पला सल्लू के पास से बरामद किया।
 
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हल्के हरे रंग की टी शर्ट पहने हुए दोषी, मृतक युग अग्रवाल का फाइल फोटो - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अलीगढ़ में देहली गेट इलाके के दस्ताना व्यापारी के बेटे की अपहरण के बाद हत्या में एक दोषी को उम्रकैद और एक बाल अपचारी (किशोर) को 20 वर्ष की सजा सुनाई गई है। यह फैसला एडीजे विशेष पॉक्सो तृतीय वीरेंद्र नाथ पांडेय की अदालत से सुनाया गया है। साथ ही दोनों पर 1.20-1.20 लाख रुपये अर्थदंड भी नियत किया है। आधी रकम पीड़ित परिवार को दी जाएगी। बता दें कि इस घटना को दस लाख रुपये की फिरौती के लिए अंजाम दिया गया था।

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ये घटना एक अक्तूबर 2019 की सुबह की है। कुंजलपुर निवासी दस्ताना व्यापारी हरीश अग्रवाल की पत्नी संगीता अग्रवाल ने मुकदमा दर्ज कराया था कि उनका 13 वर्ष का बेटा युग अग्रवाल सुबह नौ बजे घर से बाजार सामान लेने गया था, मगर वह नहीं लौटा। इसी बीच दोपहर में हरीश अग्रवाल के फोन पर एक अंजान नंबर से कॉल आई और बेटे की सलामती के लिए दस लाख रुपये की फिरौती मांगी। शाम चार बजे तक रुपयों का इंतजाम करने की बात कही गई।

इस पर परिजन थाने पहुंचे और मुकदमा दर्ज कराया। कुछ देर बाद जानकारी हुई कि युग को पड़ोसी मोहल्ला नगला मौलवी प्रतिभा काॅलोनी बन्नादेवी के गगन गुप्ता व उसके साथी बाल अपचारी संग बाइक पर जाते देखा गया है। इस बीच दूसरी बार फिर फोन आया और फिरौती मांगी गई। पुलिस ने प्रयास तेज कर दिए। दोनों को गिरफ्तार कर लिया। उनकी निशानदेही पर रात एक बजे पुलिस ने युग का शव गभाना क्षेत्र में पला सल्लू के पास से बरामद किया।
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उसकी गला दबाकर हत्या की गई थी। पोस्टमार्टम में भी इस बात की पुष्टि हुई। इसी आधार पर चार्जशीट दायर की गई। न्यायालय में बाल अपचारी की उम्र 16 वर्ष एक माह निर्धारित की गई। इसी मुकदमे में सत्र परीक्षण के दौरान साक्ष्यों व गवाही के आधार पर अदालत ने गगन को उम्रकैद व बाल अपचारी को बीस वर्ष कैद के साथ अर्थदंड से दंडित किया है।

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इकलौता बेटा है, आसानी से मिलेगी रकम

आरोपियों ने स्वीकारा कि उनका युग के पिता की दुकान पर आना जाना था। इसलिए उन्होंने युग को निशाना बनाया कि वह इकलौता बेटा है। वहां से फिरौती आसानी से मिल जाएगी। उन्होंने रुपयों की जरूरत पर फिरौती के लिए अपहरण करना स्वीकारा। बताया कि अपहरण के बाद ही बाल अपचारी के घर ले जाकर युग की हत्या कर दी थी। शव छिपा दिया था।

नहीं था कोई चश्मदीद, इन साक्ष्यों ने कराई सजा
इस मामले में कुल 14 गवाही कराई गईं। जिनमें वादी, उसका पति, रिश्तेदार शिवम के अलावा पुलिस के चार गवाह, पोस्टमार्टम करने वाले डाॅक्टर, बीएसएनएल के दो अधिकारी, पांच आम लोग थे। बचाव पक्ष की ओर से कोई चश्मदीद साक्षी न होने का तर्क दिया गया। अभियोजन पक्ष ने बच्चे को ले जाते हुए देखने वाले गवाहों, जिस सिम से फिरौती मांगी गई थी, उसके स्वामी को तलब किया। जिसने स्वीकारा कि बाल अपचारी उसके भांजे का दोस्त है और अपचारी ने भांजे से बहाने से सिम ले लिया था। इसके बाद बीएसएनएल अधिकारियों ने भी उसके समर्थन में गवाही दी। इन तथ्यों के आधार पर सजा हुई है। जिसमें हाईकोर्ट ने चार माह में मुकदमा निस्तारण के निर्देश दिए थे। उसका भी ध्यान रखा गया।

परिजनों ने कोर्ट का जताया आभार
इकलौते बेटे को खोने के बाद से परिवार सदमे में था। जैसे तैसे उबरा था। 9 अगस्त को न्यायालय में सजा सुनाए जाने के बाद पति-पत्नी ने राहत महसूस की है। उन्होंने न्यायालय का आभार जताया है।
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