आरोपियों ने स्वीकारा कि उनका युग के पिता की दुकान पर आना जाना था। इसलिए उन्होंने युग को निशाना बनाया कि वह इकलौता बेटा है। वहां से फिरौती आसानी से मिल जाएगी। उन्होंने रुपयों की जरूरत पर फिरौती के लिए अपहरण करना स्वीकारा। बताया कि अपहरण के बाद ही बाल अपचारी के घर ले जाकर युग की हत्या कर दी थी। शव छिपा दिया था।
नहीं था कोई चश्मदीद, इन साक्ष्यों ने कराई सजा
इस मामले में कुल 14 गवाही कराई गईं। जिनमें वादी, उसका पति, रिश्तेदार शिवम के अलावा पुलिस के चार गवाह, पोस्टमार्टम करने वाले डाॅक्टर, बीएसएनएल के दो अधिकारी, पांच आम लोग थे। बचाव पक्ष की ओर से कोई चश्मदीद साक्षी न होने का तर्क दिया गया। अभियोजन पक्ष ने बच्चे को ले जाते हुए देखने वाले गवाहों, जिस सिम से फिरौती मांगी गई थी, उसके स्वामी को तलब किया। जिसने स्वीकारा कि बाल अपचारी उसके भांजे का दोस्त है और अपचारी ने भांजे से बहाने से सिम ले लिया था। इसके बाद बीएसएनएल अधिकारियों ने भी उसके समर्थन में गवाही दी। इन तथ्यों के आधार पर सजा हुई है। जिसमें हाईकोर्ट ने चार माह में मुकदमा निस्तारण के निर्देश दिए थे। उसका भी ध्यान रखा गया।
परिजनों ने कोर्ट का जताया आभार
इकलौते बेटे को खोने के बाद से परिवार सदमे में था। जैसे तैसे उबरा था। 9 अगस्त को न्यायालय में सजा सुनाए जाने के बाद पति-पत्नी ने राहत महसूस की है। उन्होंने न्यायालय का आभार जताया है।