जिस दिन लाखन की हत्या हुई उस दिन हमलावरों के सिर पर खून सवार था। लाखन ने खेत से दौड़कर मामी के घर में छिपकर जान बचाने की कोशिश की लेकिन घर में घुसकर बेरहमी से पीटा। हमलावरों ने लाखन के निजी अंग में रॉड दाल दी थी। आक्रोशित ग्रामीणों ने दो दिनों ने सड़क जाम कर हंगामा किया था।
इस वारदात के बाद ग्रामीणों में रोष भर गया था। दूसरे दिन तो वाहनों पर ईंट-पत्थर तक फेंके गए। आरोपियों की ताबड़तोड़ गिरफ्तारी के बाद लोगों का गुस्सा शांत हुआ था। हालांकि, हत्या के तीन महीने बाद ही आरोपी बाहर आ गए थे।
पिता ने बयां की दरिंदगी की इंतिहा
अदालत में गवाही देने पहुंचे पिता हरपाल ने बताया कि चिकित्सक ने चोटों को देखते हुए इस बात का उल्लेख किया था कि लाखन के निजी अंग में रॉड तक डाल दी गई थी। दोषियों को सजा मिलने के बाद हरपाल ने कहा कि यह बात अलग है कि बेटा वापस नहीं आ सकता। लेकिन, कम से कम अदालत ने उन्हें उनके किए की सजा दी है। लाखन हरपाल का सबसे छोटा बेटा था। खेती व मजदूरी के सहारे परिवार पाल रहे हरपाल को बेटे लाखन से आस थी कि वह पढ़कर कुछ करेगा। दो बेटे उसके साथ ही मजदूरी करते हैं। तीनों बेटियों की शादी हो चुकी है।
एडीजीसी जेपी राजपूत ने बताया कि मुकदमे में दो पार्ट में चार्जशीट आई। एक में 2020 व दूसरे में 2021 में आरोप तय हुए। फिर दोनों पत्रावली एक हुईं। कुल 9 गवाह कराए गए। जिनमें वादी, मृतक की भाभी, एक अन्य महिला, दो चिकित्सक, एसआई, दो विवेचक एसएचओ, मुकदमा लेखक शामिल रहे। भाभी की गवाही में मृतक लाखन की दोस्ती आरोपियों के परिवार की बेटी से उजागर हुई। उसने अपनी गवाही में अदालत में बताया कि युवती का परिवार इस दोस्ती के विरोध में था। उन्हें कुछ अलग अंदेशा था। इसी के चलते खेत पर अकेला पाकर घेरकर हत्या की गई। अदालत ने इसी रंजिश को हत्या का कारण माना है।
दीवानी में रही कड़ी सुरक्षा, हटाई गई भीड़
15 फरवरी को लंच बाद पत्रावली पेश की गई। सभी आरोपी अदालत में हाजिर थे। तीन बजे के बाद सुनवाई करते हुए अदालत ने सभी को अभिरक्षा में लेने का आदेश दिया। इसके बाद अचानक से पुलिस की सक्रियता बढ़ गई। खबर पर दीवानी सुरक्षा दल व पुलिस अदालत के बाहर पहुंच गई। वहां लगी भीड़ को इधर-उधर किया गया। सजा सुनाए जाने बाद सभी को सुरक्षा के बीच दीवानी हवालात व जेल पहुंचाया गया। जेल में सभी को निगरानी में रखा गया है।