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संदिग्ध लगने पर पकड़ा एएमयू का लीबियाई छात्र

Fri, 08 Mar 2019 01:12 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाला एएमयू छात्र बन्नादेवी थाने में। - फोटो : Amar Ujala
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अलीगढ़। आधार कार्ड से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आरटीओ पहुंचे एएमयू के लीबियाई छात्र को संदिग्ध लगने पर पकड़ लिया गया। आरटीओ कर्मियों ने इसकी खबर पुलिस और आला अधिकारियों को दी। आननफानन में एसएसपी मौके पर पहुंचे और छात्र को बन्ना देवी थाने ले जाया गया।
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आरटीओ में भी अफरातफरी का माहौल हो गया। जांच पड़ताल के बाद पुलिस ने एएमयू के प्रॉक्टर आफिस संपर्क किया और छात्र को उनके सुपुर्द कर दिया। इस विदेशी छात्र और उसके आधार कार्ड दोनों की जांच की जा रही है। 

लीबिया निवासी मो. हुसैन अली एएमयू से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में एमटैक कर रहा है। वह अलीगढ़ में धौर्रा माफी स्थित न्यू इकरा अपार्टमेंट में रहता है। गुरुवार को वह अपना ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आरटीओ पहुंचा। उसने अपना आधार कार्ड डीएल बनाने वाले कर्मचारियों को दिखाया।
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कर्मचारियों के मुताबिक पहली नजर में ही वह युवक संदिग्ध लगा। इस पर आधार कार्ड की ऑनलाइन जांच की गई, जिसमें वह सही मिला। फिर भी संदेह की स्थिति में कर्मचारियों ने अधिकारियों को इसकी खबर दे दी। 

इस सूचना पर बन्ना देवी थाना पुलिस भी तुरंत पहुंच गई। पुलिस ने युवक को हिरासत में ले लिया और पूछताछ के वास्ते थाने ले गई। पूछताछ में युवक ने अपनी पूरी पहचान बताई। विदेशी युवक के पकड़े जाने की खबर फैलते ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों में भी हलचल मच गई।

आरआई के सवाल पर घिरा, तब हुआ संदेह
 आरटीओ दफ्तर लाइसेंस बनवाने पहुंचा लीबिया का युवक इंटरव्यू क्लर्क के सवालों पर उलझने और आधार कार्ड की मूल प्रति न होने के कारण झंझट में फंस गया था। हालांकि पुलिस पड़ताल के बाद उसके आधार कार्ड को मान्य घोषित कर दिया गया। मगर आरटीओ स्तर से इतना तय हो गया है कि उसका ड्राइविंग लाइसेंस यहां से नहीं बन सकेगा।

वाकये की शुरुआत इस तरह से हुई कि इस युवक ने ऑनलाइन डीएल के लिए आवेदन किया था और गुरुवार को उसे इंटरव्यू के लिए इंटरव्यू क्लर्क के सामने पेश होना था। यहां वह एक भारतीय एएमयू छात्र के साथ पहुंचा और जब उससे बातचीत में आधार कार्ड की मूल प्रति मांगी तो उसने खुद को एएमयू का छात्र बताते हुए क्लर्क को धमकी में लेने की कोशिश की।

मगर क्लर्क नहीं माना और विवाद बढ़ने पर वहां आरआई व एआरटीओ भी पहुंच गए। उनसे बातचीत में यह बात खुली कि यह विदेशी है तो उन्होंने संदेह पैदा होने पर पुलिस बुला ली। उनके संदेह का कारण यह था कि युवक अपना मूल आधार कार्ड नहीं लाया था।

हालांकि बाद में पुलिस ने जांच में उसके आधार कार्ड के सत्यापन के बाद उसे छोड़ दिया। मगर इस संबंध में आरटीओ राधेश्याम स्तर से स्पष्ट किया गया है कि चूंकि वह भारतीय नागरिक नहीं है, इसलिए उसका यहां लाइसेंस नहीं बन सकता।

दोपहर में एक युवक कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आया था। कर्मचारियों ने उससे आधार कार्ड मांगा। संदिग्ध लगने पर आधार कार्ड की जांच कराई। युवक से पूछताछ की तो उसने खुद को लीबिया का बताया। बाद में युवक को पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।
- राधेश्याम, आरटीओ

मानकों के अनुसार अगर कोई विदेशी व्यक्ति भारत के किसी भी शहर में 182 दिनों से रह रहा है, तो वह अपने निवास की पहचान के लिए आधार कार्ड बनवा सकता है। इस छात्र के पास जो आधार कार्ड मिला है उसकी जांच कराई जा रही है। छात्र एएमयू में पढ़ता है इसलिए उसे एएमयू प्रोक्टोरियल टीम के सुपुर्द कर दिया है। पूरे मामले की जांच की जा रही है।
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- आकाश कुलहरि, एसएसपी
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