अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर मोहम्मद मसरूर अख्तर खान के शोध में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है कि दो नई तकनीक को जोड़कर नींबू घास तेल की पैदावार में 40 फीसदी का इजाफा कर सकते हैं। उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद लखनऊ (उप्र) की एक शोध परियोजना में कार्य के दौरान पाए गए निष्कर्ष के आधार पर खुलासा किया है।
प्रो. मसरूर ने बताया कि भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र मुंबई की ओर से प्रोसेस किए गए कुछ समुद्री पालीसेकेराइड और सिलिकान नैनो पार्टिकल्स मिलाकर लेमनग्रास के पौधों पर छिड़काव किया। दोनों केमिकल सुरक्षित और काफी सस्ते भी हैं। उन्होंने पाया कि दोनों केमिकल के एक साथ इस्तेमाल के नतीजे बहुत हैरतअंगेज साबित हुए।
प्रो. खान ने कहा कि लेमनग्रास तेल का बड़े पैमाने पर इत्र के कारोबार में इस्तेमाल किया जाता है। लेमनग्रास का तेल दुनिया भर में साबुन, कास्मेटिक और खाने का जायका बढ़ाने में भी किया जता है। इसका उपयोग कीट विकर्षक और अरोमाथेरेपी के स्रोत के रूप में भी किया जाता है। उन्होंने अमेरिका के ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी से पोस्ट डाक्टरेट किया है। वह लगभग चार दशकों से मेडिसिनल और एरोमेटिक पौधों पर शोध कर रहे हैं। उन्होंने लगभग 200 शोध पत्र, 10 किताबें और एक पेटेंट भी कराया है।