अब पड़ोसियों से रिश्ते बिगड़ने पर देरी से जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने वाले आवेदकों को परेशानियां उठानी पड़ेगी। एक साल से अधिक वक्त बीत जाने पर जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र आवेदन की जांच करने वाले अधिकारी या कर्मचारी पड़ोसियों की गवाही और उनके आधार कार्ड की छायाप्रति भी लेंगे। नये प्रारूप के तहत यह प्रमाणपत्र एसडीएम द्वारा आरसीसीएमएस पोर्टल से जारी होंगे। नगर निगम जोन कार्यालयों से आवेदक नए प्रारूप को प्राप्त कर आवेदन करेंगे । इन आवेदनों की जांच सौंपने का अधिकार भी एसडीएम को सौंपा गया है। वह जांच लेखपाल से कराएंगे या नगर निगम के कर्मचारी अथवा पुलिस से यह निर्णय एसडीएम के विवेकाधिकार पर निर्भर करेगा ।
ये हैं मामले
केस एक- गाजियाबाद के वसुंधरा सेक्टर दो-ए निवासी सुधीर कुमार शर्मा ने एक साल पहले बन्नादेवी के एक नर्सिंग होम में जन्मी बेटी शिविका शर्मा के जन्म प्रमाणपत्र के लिए 17 अक्तूबर को आवेदन किया था। एक सप्ताह पहले प्रमाणपत्र जारी भी किया तो उसमें बेटी, माता-पिता का सरनेम ही गायब है। अब प्रमाणपत्र सही कराने के जोन प्रभारी-चार से लेकर एसडीएम समेत अन्य अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
केस दो- एटा बाईपास के निधिवन कॉलोनी की कृपा देवी ने पति के देहांत के बाद उनके मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था। करीब ढाई महीने से वह प्रमाणपत्र पाने के लिए भटक रहीं हैं। विभागीय स्तर से कर्मचारी एवं अधिकारी कोई न कोई कमी बताकर वापस भेज देते हैं।