समस्या शेष 59 हेक्टेयर निजी जमीन के अधिग्रहण में आ रही थी, जिसके कारण सीधे खरीद संभव नहीं हो पा रही थी। यह समस्या इसलिए आ रही थी कि कई मामलों पर न्यायालयों में सुनवाई चल रही है। बताया गया है कि लगभग 15 हेक्टेयर में ऐसे प्लॉट हैं, जिनके बैनामे तो हो चुके हैं, लेकिन मालिकाना हक अभी भी खतौनी (राजस्व रिकॉर्ड) में दर्ज नहीं है। इसके अलावा कुछ जमीनें कृषि श्रेणी की हैं, लेकिन उनके स्वामी आवासीय दर से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। कुछ भूखंडों पर मकान बने हुए हैं, जिससे मामला और जटिल हो गया है।
जेवर मॉडल पर होगा अधिग्रहण, शासन की मुहर
इन जटिलताओं को पार करने के लिए जिला प्रशासन ने जेवर एयरपोर्ट मॉडल को आधार बनाते हुए सीधे अधिग्रहण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था इसको अब शासन स्तर से अनुमति मिल गई है।