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अलीगढ़: पूर्व विधायक प्रमोद गौड़ और बेटे पर होगी एफआईआर, खैर चेयरमैन के राखी वीडियो से जुड़ा है मामला

Sun, 01 Nov 2026 01:59 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

खैर की रहने वाली महिला ने अदालत में दिए प्रार्थना पत्र में कहा कि 26 अगस्त को खैर चेयरमैन संजय शर्मा के कोल्ड स्टोर पर रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें वह अन्य महिलाओं के साथ शामिल हुई थीं। इस दौरान चेयरमैन को राखी बांधते हुए फोटो और वीडियो बनाए गए थे।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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अलीगढ़ में खैर के चेयरमैन संजय शर्मा को रक्षाबंधन पर राखी बांधने पहुंची महिला के वीडियो को लेकर उठा विवाद अब अदालत पहुंच गया है। महिला की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए एमपी-एमएलए कोर्ट संख्या-2 ने पूर्व विधायक प्रमोद गौड़, उनके बेटे एवं पूर्व ब्लॉक प्रमुख दिवाकर गौड़ और राजीव शर्मा उर्फ राजू के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

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अदालत ने वीडियो के संपादन, सोशल मीडिया पर प्रसार और आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में पुलिस को विवेचना करने के निर्देश दिए हैं। विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या-2 के न्यायाधीश अंकित राज सिंह ने 30 अक्तूबर को यह आदेश पारित किया। अदालत ने खैर थानाध्यक्ष को निर्देश दिया है कि महिला के प्रार्थना पत्र में वर्णित तथ्यों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर संबंधित दस्तावेज और पेन ड्राइव को विवेचना में शामिल किया जाए। एफआईआर की प्रति सात दिन के भीतर न्यायालय में दाखिल करने के लिए भी कहा गया है।

खैर की रहने वाली महिला ने अदालत में दिए प्रार्थना पत्र में कहा कि 26 अगस्त को खैर चेयरमैन संजय शर्मा के कोल्ड स्टोर पर रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें वह अन्य महिलाओं के साथ शामिल हुई थीं। इस दौरान चेयरमैन को राखी बांधते हुए फोटो और वीडियो बनाए गए थे। महिला का आरोप है कि संबंधित वीडियो को एडिट करके उसके साथ आपत्तिजनक और अशोभनीय टिप्पणियां जोड़ दी गईं। इसके बाद फेसबुक और व्हाट्सएप के माध्यम से इन्हें प्रसारित किया गया।

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याचिका के मुताबिक, महिला ने इस मामले में खैर थाने में शिकायत दी थी, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। इसके बाद 31 अगस्त को पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के जन शिकायत प्रकोष्ठ में भी प्रार्थना पत्र दिया गया। महिला ने अदालत में आरोप लगाया कि उसे धमकियां भी दी जा रही हैं और इस घटनाक्रम से उसे मानसिक व सामाजिक आघात पहुंचा है।

अदालत ने आदेश में कहा कि मामले में वीडियो की वास्तविक सामग्री, उसके कथित संपादन, सोशल मीडिया पर प्रसारण, संबंधित खातों की पहचान और टिप्पणियों के स्रोत की जांच आवश्यक है। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्य जुटाने की जरूरत है, जो पुलिस विवेचना के माध्यम से प्रभावी ढंग से की जा सकती है।
हमारी ओर से वीडियो में किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई है। कुछ लोग महिला को आगे कर इस मामले को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं। मुझे पुलिस की निष्पक्ष जांच पर पूरा भरोसा है। मैं हर तरह की जांच के लिए तैयार हूं। - प्रमोद गौड़, पूर्व विधायक
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