याचिका के मुताबिक, महिला ने इस मामले में खैर थाने में शिकायत दी थी, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। इसके बाद 31 अगस्त को पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के जन शिकायत प्रकोष्ठ में भी प्रार्थना पत्र दिया गया। महिला ने अदालत में आरोप लगाया कि उसे धमकियां भी दी जा रही हैं और इस घटनाक्रम से उसे मानसिक व सामाजिक आघात पहुंचा है।
अदालत ने आदेश में कहा कि मामले में वीडियो की वास्तविक सामग्री, उसके कथित संपादन, सोशल मीडिया पर प्रसारण, संबंधित खातों की पहचान और टिप्पणियों के स्रोत की जांच आवश्यक है। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्य जुटाने की जरूरत है, जो पुलिस विवेचना के माध्यम से प्रभावी ढंग से की जा सकती है।
हमारी ओर से वीडियो में किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई है। कुछ लोग महिला को आगे कर इस मामले को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं। मुझे पुलिस की निष्पक्ष जांच पर पूरा भरोसा है। मैं हर तरह की जांच के लिए तैयार हूं। - प्रमोद गौड़, पूर्व विधायक