बेगम अजीजुन निसा हॉल में लगे गो बैक के नारे
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें सचिव पद के एक प्रत्याशी के लिए गो बैक के नारे लगे। दरअसल, एक छात्रा ने एक सवाल किया, जिसके जवाब में प्रत्याशी ने कहा कि सवाल नहीं कर सकती हैं, जिसके बाद छात्राओं ने गो बैक के नारे लगाए। वहीं, प्रत्याशियों की शेरवानी पोशी भी हुई।
फरहान या चुनाव अधिकारी कौन बोल रहा सच
अध्यक्ष पद के प्रत्याशी फरहान जुबैरी का नामांकन रद होने के बाद सच फरहान बोल रहे हैं या मुख्य चुनाव अधिकारी, इस पर बहस छिड़ गई है। लिंगदोह की रिपोर्ट के अनुसार उम्मीदवार का कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए और उस पर पुलिस मामला दर्ज नहीं होना चाहिए। इसके लिए नामांकन के दौरान प्रत्याशी को शपथ पत्र देना होता है।
फरहान जुबैरी का कहना है कि नामांकन के दौरान उन्होंने इस तरह कोई शपथ पत्र नहीं दिया था, जबकि चुनाव अधिकारी का कहना है कि फरहान ने शपथ पत्र दिया था। इसके बाद उनका नाम फाइनल सूची में बतौर प्रत्याशी घोषित किया गया था। मुख्य चुनाव अधिकारी प्रो. जावेद तालिब के अनुसार, फरहान पर आपराधिक रिकॉर्ड और पुलिस मामला दर्ज होने की शिकायत छात्रों ने की थी। इसके बाद प्रॉक्टर कार्यालय से जानकारी मांगी गई, जिसमें फरहान पर आपराधिक रिकॉर्ड और पुलिस मामला दर्ज होने की बात सामने आई और शुक्रवार देर रात उनका नामांकन रद करना पड़ा।
अध्यक्ष के बयानों की गृहमंत्री से शिकायत
एएमयू छात्रसंघ चुनाव के बीच अध्यक्ष पद के प्रत्याशी नोमान अशरफ के बयानों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। क्षत्रिय करणी सेना ने आरोप लगाया है कि नोमान अशरफ ने अपने बयानों में शरजील इमाम और उमर खालिद का समर्थन किया है। संगठन ने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग केंद्रीय गृह मंत्री से की है। क्षत्रिय करणी सेना के युवा जिला अध्यक्ष सचिन राघव ने कहा कि बयानों की प्रामाणिकता और उनके वास्तविक संदर्भ की जांच होनी चाहिए।
देश के खिलाफ गतिविधि में शामिल लोगों का समर्थन न करें : नदीम
एएमयू छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष मोहम्मद नदीम अंसारी ने कहा कि छात्र राजनीति करने वाले किसी भी व्यक्ति को देश के खिलाफ गतिविधियों में शामिल लोगों का समर्थन नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शरजील इमाम और उमर खालिद पर देश के खिलाफ साजिश करने के आरोप हैं और सरकार उनके खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई कर रही है। ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और कानून का सम्मान किया जाना चाहिए।