अलीगढ़ के खैर नगर पालिका द्वारा उदयगढ़ी में संचालित कान्हा गोशाला में गोवंशों की मौत के मामले में चेयरमैन खैर और अधिशासी अधिकारी अपने ही जाल में फंस गए हैं। एसडीएम खैर के नेतृत्व वाली टीम की जांच में खुलासा हुआ है कि चार गोवंश की मौत भूख से तड़प-तड़प कर हुई थी।
कमिश्नर के आदेश पर डीएम ने चेयरमैन और ईओ को घटना के लिए जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ शासन को लिख दिया है।
उन पर पालिका के संसाधनों से वहां रह रहे गोवंश के चारा आदि उपलब्ध न कराने और गायों की मौत पर गुमराह करने का आरोप लगाया गया है। कमिश्नर ने ईओ को तलब कर फटकार लगाई है। पशुपालन निदेशालय से आए संयुक्त निदेशक भी गोशाला पहुंचे और हालातों का निरीक्षण कर रिपोर्ट डीएम को भेजी है।
मालूम हो कि पिछले दिनों खैर नगर पालिका द्वारा संचालित कान्हा गोशाला में चार गायों की मौत से हड़कंप मच गया था। खैर नगर पालिका चेयरमैन संजीव अग्रवाल ने जेसीबी ऑपरेटर के हवाले से इस गोशाला में 141 गोवंशों की मौत होने और उन्हें गोशाला के पीछे ही गड्ढे में दबाए जाने की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर कर दी थी। आरोप था कि गायों की संख्या पूरी करने के लिए दूसरी गायों को पकड़वा कर मृत गायों के ईयर टैग उन्हें पहना दिए जाते हैं।
गुरुवार को कमिश्नर ने सुबह ही ईओ संदीप सक्सेना को तलब कर फटकार लगाई। इधर, डीएम के आदेश पर एसडीएम खैर अंजुम बी, सीवीओ डा. केपी वार्ष्णेय मौके पर पहुंचे और जांच की। चारा रजिस्टर की जांच में पता चला कि पिछले 188 दिनों में गोवंश के लिए 266 क्विंटल भूसा तथा 404 क्विंटल हरा चारा खरीदा गया है।
जबकि प्रति गोवंश औसतन पांच किलो सूखा चारा और दस किलो हरे चारे की की आवश्यकता होती है। उक्त अवधि में 2961 क्विंटल चारे की आवश्यकता थी। साफ है कि गोवंशों को आवश्यकता के सापेक्ष मात्र एक चौथाई चारा ही दिया गया है। आधा पेट भोजन मिलने से गोवंश कमजोर होकर मर रह हैं। कई बार बुलाने पर ईओ खैर वहां नहीं पहुंचे और न ही स्टॉक रजिस्टर और दैनिक उपभोग पंजिका दिखाई गई। गोशाला में कीचड़ और जालियां टूटी हुई मिली हैं।
एसडीएम खैर अंजुम बी ने बताया कि जांच में गोशाला में मौके पर चारा नहीं मिला। गंदगी, कीचड़ और पीने का पानी भी गंदा मिला। चारा रजिस्टर की जांच में पता चला कि पिछले 188 दिनों में आवश्यकता का मात्र एक चौथाई ही भूसा व हरा चारा खरीदा गया है। आधा पेट खाना मिलना गायों की मौत की मुख्य वजह है। इसकी रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है। इस मामले में ईओ, लिपिक व संबंधित ठेकेदार से तीन दिन में स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
वहीं सीवीओ डॉ. केपी वार्ष्णेय ने बताया कि गायों की मौत आधा पेट खाना मिलने की वजह से हुई है। इसके लिए पालिका प्रशासन जिम्मेदार है। निकाय क्षेत्रों में निकाय प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने क्षेत्र की गोशालाओं में अपने संसाधनों से गोवंश के लिए चारे पानी की व्यवस्था करें। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में था कम भोजन का उल्लेख
सीवीओ डा. वार्ष्णेय ने बताया कि सितंबर और अक्तूबर माह में इस गोशाला में चार गायों की मौत हुई थी। इन गायों का पोस्टमार्टम करने वाले पशु चिकित्सक डॉ. मनोज शर्मा ने मौत का कारण गोवंश को आधा पेट भोजन मिलना बताया था और अधिशासी अधिकारी को अपनी रिपोर्ट रिसीव करायी थी। परंतु इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
अपने बयान में खुद फंसे चेयरमैन
हाल ही में एसडीएम खैर के रूप में चार्ज लेने वाली एसडीएम खैर अंजुम बी से चेयरमैन संजीव अग्रवाल ने मुलाकात की थी और कान्हा गोशाला में सभी व्यवस्थाएं चाक चौबंद बताकर इसे मॉडल के रूप में विकसित कराने की बात कही थी।
रंजिश के चलते फरवरी 2018 में उन्होंने मुख्यमंत्री व डीएम को पत्र भेजकर जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की थी। गृह मंत्रालय से उनके लिए सुरक्षा गार्ड भी मंजूर हो गए थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें सुरक्षा नहीं दी। जान का खतरा होने के चलते वह लंबे समय से सिटी से दूर स्थित गोशाला में स्वयं जाकर निरीक्षण नहीं कर पा रहे थे।
खैर नगर पालिका के चेयरमैन संजीव अग्रवाल ने कहा कि इस वजह से उन्हें गोशाला की अनियमितताओं की जानकारी नहीं मिली। बुधवार को जब एक किसान ने गायों के मरने की सूचना उन्हें दी तो उनसे नहीं रुका गया। इसमें ईओ की बड़ी लापरवाही रही है। उन्होंने चारे की व्यवस्था के इंतजाम क्यों नहीं किये और न ही मुझे जानकारी दी।
लखनऊ से आए पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक ने भी जानी स्थिति
अलीगढ़ आए जिले की गोशालाओं के नोडल अधिकारी/पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक वीरेंद्र सिंह भी घटना का स्वयं संज्ञान लेकर गुरुवार को गोशाला पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि सुबह खैर की गोशाला में गोवंशों की मौत की खबर जब उन्होंने पढ़ी तो वह अपने को रोक नहीं पाए और गोशाला पहुंच गए।
एसडीएम खैर ने बताया कि पालिका के रजिस्टर के मुताबिक कान्हा गोशाला में 105 गोवंश थे। जबकि पशुपालन विभाग ने नौ फरवरी को शुरू हुई इस गोशाला में उपलब्ध 97 गोवंशों की ईयर टैगिंग की। बृहस्पतिवार को निरीक्षण में यहां 84 गोवंश मिले।
कान्हा गोशाला के संचालन और वहां रह रहे गोवंशों के चारा पानी आदि की जिम्मेदारी खैर नगर पालिका प्रशासन की थी। उन्होंने अपने कर्तव्य का भलीभांति निर्वहन नहीं किया। ऊपर से गलत बयानी कर सभी को गुमराह करने की कोशिश की। इस मामले में चेयरमैन एवं ईओ को जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है।
141 मृत गोवंशों को दबाने के मामले की होगी जांच
एसडीएम खैर अंजुम बी ने बताया कि कान्हा गोशाला में पिछले कुछ समय में मृत 141 गायों को गोशाला के पीछे की जमीन पर दबाने के आरोपों की भी जांच होगी। इसके लिए आरोप लगाने वाले जेसीबी चालक अनूप सारस्वत को शुक्रवार को बयान देने के लिए बुलवाया गया है। बताते चलें कि जेसीबी चालक का एक वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें उसके हवाले से मृत गायों को गोशाला के पीछे दफन करने की बात कही गई थी।