साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कितने पाकिस्तान विशिष्ट शैली में लिखा बहुचर्चित उपन्यास है। इस उपन्यास को लेकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में एक संगोष्ठी रखी गई थी। वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम कुमार बताते हैं कि संगोष्ठी में अलीगढ़ का पूरा बौद्धिक समाज उमड़ आया था। कमलेश्वर के साथ ही उनके उपन्यास के प्रति भी लोगों का खासा आकर्षण था।
काजी अब्दुल सत्तार, वेद प्रकाश अमिताभ, प्रेम कुमार, केपी सिंह, नमिता सिंह, सुरेश कुमार, राहत अबरार, शाफे किदवई, मेहताब हैदर नकवी, शिराज अजमली, तारिक छतारी, काजी अफजाल, अगारमी दुख्त सफवी जैसे साहित्यक दिग्गज मौजूद थे। कमलेश्वर का व्याख्यान जादुई था। आज भी लोग उसे याद करते हैं।
कमलेश्वर के साथ मैं भी हो गया गिरफ्तार : प्रो. प्रेम कुमार
साहित्यकार डॉ. प्रेम कुमार ने साहित्यकार कमलेश्वर के बारे में कहते हैं ‘भीषण ठंड और घने कोहरे में तय समय से पहले पहुंचने के बावजूद कमलेश्वर जी ने जरा भी प्रतीक्षा नहीं कराई। डनहिल के पैकेट से सिगरेट निकालते हुए वे अतिथि कक्ष में मेरे सामने आकर बैठ गए थे। केन का सोफा दीवान, मेज, गद्दे, पर्दे, एकाधिक ऐशट्रे, गमले, पौधे, फूल, ढेर सारे प्रतीक प्रशस्ति पत्र, सब अपनी सुरुचि सम्पन्नता और कलात्मकता की बातें बताने को उत्सुक से थे।
कमलेश्वर जी की चाल-ढालए बातचीत में चुस्ती-फुर्ती उनके उल्लास, उत्साह आदि ने उस समय अलग से ध्यान आकर्षित किया था। सबसे पहले मैंने कमलेश्वर जी से उस क्षण या घटना विशेष के बारे में जानना चाहा था, जिसने उन्हें लेखन के रास्ते की ओर मोड़ा। सुदूर अतीत की दूरी को पारकर वे तुरंत उस कालखंड में पहुंच गए थे, देखिए, बचपन में में समाजवादी क्रांतिकारी पार्टी से जुड़ गया था। पार्टी का आदेश हमारे लिए अंतिम होता था किसान आंदोलन चल रहा था तब योगेश चटर्जी दिल्ली में थे। केशव प्रसाद कहीं और गए हुए थे। हम कुछ लोग ऑफिस में बैठे हुए थे।
पुलिस आई और हमें गिरफ्तार कर लिया गया। थोड़ा भय का क्षण भी था वह। नैनी जेल की खपरैल की कोठरी में 19 दिन बंद रहे। खेतों की निराई का काम मिला वहां। घास की जगह अन्न उखाड़कर हम अपना आक्रोश व्यक्त करते। 19वें दिन जेलर राउंड पर आया। हमें देखा स्टाफ से पूछा कि इन नाबालिग लड़कों को क्यों पकड़ा, पकड़ा भी तो अब तक कोर्ट में पेश क्यों नहीं किए गए। उसने कहा कि इन्हें तुरंत छोड़ दो या फंस जाओगे। हमें निकलने के लिए मनाया गया। तब हमें बीड़ी का चस्का चुका था। लाल मोहम्मद बीड़ी बड़ी ‘फेमस’ थी तब एक बडल पंप और रिक्शे से लौटने के लिए छह आने पैसे लेकर हम बाहर आए। पैसा बचाने की गर्ज से पैदल चल पड़े’।