कल्याण सिंह शुरुआत से ही एक नारा देते थे कि गांव खुशहाल तो देश खुशहाल। मेरा बूथ दस यूथ। इस नारे के सहारे वे पार्टी को आगे बढ़ाने का काम करते थे। पार्टी के प्रति उनकी मेहनत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बैठकों या रैलियों में वे उस समय साधन न होने से साइकिल तक से जाते थे।
दोस्तों को हमेशा रखा याद
उनके समय के केएमवी के शिक्षक रहे डीएस लोधी बताते हैं कि कल्याण सिंह अपने दोस्तों को हमेशा याद रखते थे। उन्होंने अपने साथ के बचपन के मित्र पिलखुनी के नवल सिंह वर्मा और नौअरी के राम सिंह को हमेशा याद रखा। राम सिंह को गैर राजनीतिक होते हुए भी ब्लाक प्रमुख बनवाया। नवल सिंह के बीमार होने की खबर पर खुद दिल्ली से आकर उनसे मिलने पहुंचे और देखकर रोए। डीएस लोधी कहते हैं कि मुझे उन्होंने खुद एक चिठ्ठी भेजी और समय से घर पहुंचने की हिदायत दी। 1980 में मढ़ौली आकर रुके अटल विहारी वाजपेयी के सामने मुझसे कविता पाठ कराया। कल्याण सिंह बहन बेटियों के सम्मान, अपनों के आयोजन, क्षेत्र के परंपरागत आयोजन आदि को तवज्जो देते थे।
रामलला के दर्शन की इच्छा रही अधूरी
कल्याण सिंह का जीवन राम मंदिर के लिए संघर्ष भरा रहा। उन्होंने विवादित ढांचा गिराए जाने के समय कारसेवकों पर गोली चलवाने के बजाय अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। दो बार भाजपा से दूरी बनी। मगर भव्य मंदिर में रामलला विराजमान के दर्शन की इच्छा अधूरी रह गई।
भाजपा को भी था उनकी ताकत का अंदाजा
युवा जीवन में जनसंघ और फिर भाजपा को एक पौधे के रूप में सींचने वाले कल्याण सिंह की ताकत का अंदाजा भाजपा को भी था। जब पहली बार उन्होंने भाजपा से दूरी बनाई, तब भाजपा को नुकसान हुआ। दूसरी बार दूरी बनाई, तब भी भाजपा को नुकसान हुआ। 2013 में मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से कल्याण सिंह की पुन: भाजपा में वापसी हुई। इसके बाद ही पार्टी ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 में से 71 सीटें जीतीं थीं।
हर साल होगा हिंदू गौरव दिवस
अतरौली विधानसभा सीट पर उनकी राजनीतिक विरासत संभाल रहे उनके पौत्र एवं प्रदेश सरकार में मंत्री संदीप सिंह का कहना है कि हिंदू गौरव दिवस अब प्रतिवर्ष आयोजित किया जाएगा। जिससे उनको याद किया जाता रहे और उनके आदर्शों को जन जन तक पहुंचाया जाता रहे।