आरएसएस प्रचारक से राजनीति में उतरने वाले कल्याण सिंह का जन्म अतरौली के गांव मढ़ौली में पांच जनवरी वर्ष 1932 को हुआ था। वर्ष 1967 में पहली अतरौली से विधायक बने। श्री राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा बने और वर्ष 1991 में पहली बार उत्तर प्रदेश के सीएम बने। इसी दौरान छह दिसंबर 1992 में विवादित बाबरी विध्वंस हुआ। जिसके बाद ही इस्तीफा देकर कट्टरवादी हिंदू नेता के रूप में उभरे और पूरी दुनिया में छा गए।
मंदिर आंदोलन से छाए कल्याण ने 1997 में सपा को शिकस्त दी और दोबारा सीएम बने। वर्ष 1999 में भाजपा छोड़ कर खुद की राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाई। ये पार्टी जब सफल नहीं हुई तो वर्ष 2004 में भाजपा में फिर से वापस आ गए। वर्ष 2009 में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मनमुटाव हुआ तो फिर भाजपा से अलग हुए। वर्ष 2012 में भाजपा में वापस हुए। 2014 में राज्यपाल बने। अब पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद वह सक्रिय रूप से भाजपा की राजनीति को आगे बढ़ाएंगे।
कल्याण सिंह के सक्रिय राजनीति में पदार्पण करते हुए अलीगढ़ में संगठन को लेकर जोड़तोड़ का गुणा गणित शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि भाजपा जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष पद को लेकर अंदरखाने जारी जोरआजमाइश में जल्द ही कोई निर्णय हो सकता है।
वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह राजनीतिक परिदृश्य में कल्याण सिंह के करीबी और उनके विशेष स्नेही लोगों में शुमार हैं। ऐसे में उक्त दोनों पदों पर आने को इच्छुक नेताओं को कल्याण का आशीर्वाद लेना होगा। इसलिए कई नेता लखनऊ में अभी डटे हुए हैं। हालांकि अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक चर्चा नहीं हुई है, लेकिन इस पर मंथन शुरू हो गया है।
वर्तमान में अलीगढ़ जिले में इगलास विधानसभा का उपचुनाव राजनीति के केंद्र में है। अभी तक केवल बसपा से अभय कुमार बंटी ही प्रत्याशी घोषित हुए हैं। सपा, कांग्रेस और भाजपा का प्रत्याशी घोषित होना बाकी है। भाजपा से वहां के विधायक राजवीर दिलेर हाथरस के सांसद बन चुके हैं। अब यह सीट खाली है और इस पर चुनाव होना है। इस आरक्षित सीट पर भाजपा के कई दावेदार हैं। ये दावेदार भी कल्याण सिंह का आशीर्वाद लेने लखनऊ पहुंच रहे हैं। जल्द ही इस बारे में भी फैसला होगा। जिसमें कल्याण सिंह की राय भी अहम मानी जा रही है।
अलीगढ़ वालों ने बाबू जी को हाथों हाथ लिया
कल्याण सिंह के भाजपा में फिर से सक्रिय होने के मौके पर अलीगढ़ से दर्जनों समर्थक लखनऊ पहुंचे। अलीगढ़ से छर्रा विधायक ठा. रवेंद्र सिंह, कोल विधायक अनिल पराशर, शहर विधायक संजीव राजा, जिलाध्यक्ष ठा. गोपाल सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष चौ. देवराज सिंह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामसखी कठेरिया, भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष विमलेश वर्मा, पूर्व ब्लाक प्रमुख शशि सिंह एवं उनके पति सतेंद्र सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता राजेश भारद्वाज, अतरौली के चेयरमैन पवन वर्मा, रिषीपाल सिंह, ब्लाक प्रमुख केहरी सिंह राजपूत के भाई साहब सिंह राजपूत, पूर्व महानगर अध्यक्ष दीपक मित्तल, प्रदीप पेंटर, भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष यतिन दीक्षित, चेतन शर्मा, कालीचरण वार्ष्णेय, मुकेश लोधी, शशि सिंह, सचिन जैन सहित कई भाजपाई लखनऊ पहुंचे। अमौसी एयरपोर्ट, भाजपा मुख्यालय, कल्याण सिंह के आवास, पत्रकार वार्ता से लेकर शाम तक भाजपाइयों का आना जाना वहां लगा रहा। शाम छह बजे तक उनके माल एवेन्यू स्थित आवास पर लोगों का आना जाना होता रहा। अलीगढ़, एटा, बुलंदशहर, कासगंज, हाथरस, आगरा, मैनपुरी, फरुर्खाबाद, कानपुर, इटावा, औरैया सहित प्रदेश के कई जिलों से कल्याण समर्थक लखनऊ पहुंचे।
लखनऊ में कल्याण सिंह का पूरा परिवार भी साथ रहा। जिसमें उनके पुत्र एटा सांसद राजवीर सिंह राजू, पुत्रवधू एवं पूर्व विधायक प्रेमलता वर्मा, पौत्र एवं शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह, दूसरे पौत्र सौरभ सिंह, पौत्री पूर्णिमा सिंह, समधी एवं भाजपा बृज क्षेत्र के उपाध्यक्ष श्यौराज सिंह, श्यौराज सिंह के पुत्र प्रवीण राज सिंह सहित अन्य कई रिश्तेदार और सगे संबंधी लखनऊ पहुंचे।
30 सितंबर तक आ सकते हैं अलीगढ़
कल्याण सिंह के करीबी पूर्व जिलाध्यक्ष चौ. देवराज सिंह ने बताया कि सोमवार का दिन उनके भाजपा की सदस्यता लेने और वहां लोगों से मिलने में गुजर गया। अभी अलीगढ़ आने का कार्यक्रम तय नहीं हुआ है। मंगलवार को इस संबंध में चर्चा होगी। सितंबर के दूसरे पखवाड़े में वह अलीगढ़ आ सकते हैं।
अब हो सकती है चुनाव आयोग में सुनवाई
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के सौ दिन पूरे होने पर पूरे देश में भाजपाई जश्न मना रहे हैं। इस सरकार के चुनाव के दौरान अलीगढ़ में सतीश गौतम को टिकट मिलने पर कल्याण समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया था। जिस पर कल्याण सिंह ने राज्यपाल रहते हुए कहा था कि देशहित में मोदी जी का प्रधानमंत्री बनना जरूरी है। इसलिए पार्टी ने जिसको टिकट दिया है उसको जिताना है। इस बयान पर हुई शिकायत पर चुनाव आयोग ने नोटिस दिया था। जिस पर अभी तक कोई सुनवाई शुरू नहीं हो सकी थी क्योंकि अभी तक कल्याण सिंह संवैधानिक पद पर थे। अब वह पदमुक्त हो चुके हैं तो इस मामले में सुनवाई शुरू हो सकती है।