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मेमन के चहेतों के लिए बुरे थे कलाम

Mon, 10 Aug 2015 01:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अलीगढ़
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राष्ट्रपति बनने के बाद भी डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एक शिक्षक की तरह अपनी जिज्ञासाओं के समाधान की खोज में लगे रहे। उनके जीवन के अभाव कभी भी उनकी खोज को प्रभावित नहीं कर पाए।
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डॉ. कलाम के निधन के बाद हमें उजाले की लकीरों को तलाशना होगा। लेकिन देश में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कलाम को पसंद नहीं करते। यह वे लोग हैं जो याकूब मेमन की फांसी टलवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए थें। यह बातें आरएसएस के मुखपत्र ‘पांचजन्य’ के संपादक हितेश शंकर ने रविवार को एसवी कॉलेज में डॉ. कलाम के वैचारिक श्रद्धांजलि समारोह में कहीं।
प्रज्ञा प्रबोध संस्था की ओर से आयोजित इस समारोह में उन्हाेंने कहा कि डॉ. कलाम जैसे दुर्लभ इंसान का निधन हमारे लिए बड़ी क्षति है। उस महान इंसान ने अपनी आखिरी सांस भी उस वक्त ली जब वह युवाओं को संबोधित कर रहे थे। अपनी आखिरी सांस भी वह देश के नाम कर गए।
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 समारोह के विशिष्ट अतिथि सूर्य प्रताप सिंह ने कहा कि डॉ. कलाम भारतीय संस्कृति की निशानी थे। इस दौरान पूनम बजाज, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. राजीव अग्रवाल, डॉ. विजय बहादुर, डॉ. एमके मिश्रा, डॉ. सुबोध मिश्रा, लक्ष्मण प्रसाद गौड़, डॉ. मनवीर सिंह संस्था के डॉ. बीपी पांडे आदि ने डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि दी।
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