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बेटी बढ़ेगी कैसे: एक लाख की आबादी, एक भी जूनियर स्कूल नहीं, पांचवीं के बाद छूट रही बेटियों की पढ़ाई

Thu, 16 Jul 2026 12:37 PM IST
Chaman Kumar Sharma इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

प्राथमिक विद्यालय रोरावर की दीवार से सटी सरकारी जमीन वर्षों से खाली पड़ी है। इस जमीन पर उच्च प्राथमिक विद्यालय बनाया जा सकता है। लोगों ने कहा कि यदि यहां कक्षा छह से आठ तक की व्यवस्था हो जाए तो बड़ी संख्या में छात्राएं पढ़ाई जारी रख सकेंगी।
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रोरावर की इतनी बड़ी आबादी के लिए एक भी उच्च प्राथमिक विद्यालय नहीं है - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और महिला सशक्तीकरण के सरकारी दावों के बीच अलीगढ़ का रोरावर-शाहजमाल इलाका एक अलग कहानी बयां कर रहा है। करीब एक लाख की आबादी वाले इस मुस्लिम बहुल क्षेत्र में 36 साल से एक भी उच्च प्राथमिक विद्यालय नहीं खुल सका। नतीजा है कि हर साल सैकड़ों छात्राएं पांचवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। दूर स्थित विद्यालय, सुनसान रास्ते, हाईवे का खतरा और आर्थिक तंगी बेटियों की तालीम की राह में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।

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बुधवार को प्राथमिक विद्यालय रोरावर में 466 बच्चों का पंजीकरण मिला जिनमें 245 छात्राएं थीं। विद्यालय परिसर में बच्चों की चहल-पहल तो दिखाई दी, लेकिन कक्षा पांच के बाद इन छात्राओं की शिक्षा का कोई स्पष्ट रास्ता नजर नहीं आया। आसपास एक भी उच्च प्राथमिक विद्यालय नहीं है। ऐसे में अधिकांश अभिभावक बेटियों को आगे पढ़ाने के बजाय घर बैठाना ही सुरक्षित समझते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूर और निम्न आय वर्ग के परिवार रहते हैं। उनके लिए रोजी-रोटी की जद्दोजहद के बीच बेटियों को तीन से छह किलोमीटर दूर विद्यालय छोड़ना और वापस लाना संभव नहीं है। यही वजह है कि पांचवीं तक स्कूल पहुंचने वाली अनेक छात्राओं की पढ़ाई आगे नहीं बढ़ पाती।

पांचवीं के बाद कहां जाती हैं बेटियां?
कक्षा पांच के बाद रोरावर-शाहजमाल क्षेत्र की बेटियों के सामने पढ़ाई जारी रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए निजी स्कूलों की फीस वहन करना आसान नहीं है। सरकारी व्यवस्था में उन्हें शाहपुर कुतुब स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय जाना पड़ता है, जो करीब तीन किलोमीटर दूर है, जबकि तालसपुर कलां का विद्यालय लगभग छह किलोमीटर की दूरी पर है। दूरी, सुनसान रास्ते और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण अधिकांश परिवार बेटियों को आगे नहीं पढ़ा पाते। नतीजतन बड़ी संख्या में छात्राएं पांचवीं के बाद घर बैठ जाती हैं और उनकी शिक्षा बीच में ही छूट जाती है।

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खाली पड़ी जमीन, फिर भी नहीं बना विद्यालय - फोटो : अमर उजाला
खाली जमीन, फिर भी नहीं बना विद्यालय
प्राथमिक विद्यालय रोरावर की दीवार से सटी सरकारी जमीन वर्षों से खाली पड़ी है। इस जमीन पर उच्च प्राथमिक विद्यालय बनाया जा सकता है। लोगों ने कहा कि यदि यहां कक्षा छह से आठ तक की व्यवस्था हो जाए तो बड़ी संख्या में छात्राएं पढ़ाई जारी रख सकेंगी।

पढ़ना चाहती थीं, लेकिन छूट गई किताबें
रोरावर निवासी सिमरन बताती हैं कि उन्होंने वर्ष 2018 में कक्षा पांच तक पढ़ाई की थी। आगे पढ़ने की इच्छा थी, लेकिन विद्यालय दूर होने के कारण पढ़ाई जारी नहीं रख सकीं। इसी तरह शबनाम ने वर्ष 2021 में प्राथमिक शिक्षा पूरी की, लेकिन उच्च प्राथमिक विद्यालय दूर होने और परिवार की चिंताओं के चलते उनकी पढ़ाई भी बीच में छूट गई।

शिक्षा नहीं, दूरी बन रही सबसे बड़ी बाधा
वार्ड-51 के पार्षद उम्मेद आलम का कहना है कि इलाके में उच्च प्राथमिक विद्यालय का अभाव वर्षों पुरानी समस्या है। शाहपुर कुतुब और तालसपुर के विद्यालय दूरी के साथ-साथ हाईवे और सुनसान क्षेत्र में स्थित हैं। ऐसे में अभिभावक बेटियों को भेजने से कतराते हैं। उप्र उर्दू टीचर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष गुलजार अहमद कहते हैं कि रोरावर और शाहजमाल की संयुक्त आबादी करीब एक लाख है। इतनी बड़ी आबादी में एक भी उच्च प्राथमिक विद्यालय न होना शिक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता है। इसका सबसे ज्यादा असर बेटियों की शिक्षा पर पड़ रहा है।
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सिर्फ जूनियर स्कूल नहीं, इंटर कॉलेज की भी जरूरत
शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद का कहना है कि सरकार बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन शाहजमाल-रोरावर जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। यहां सिर्फ उच्च प्राथमिक विद्यालय ही नहीं, बल्कि बालिकाओं के लिए इंटर कॉलेज की भी आवश्यकता है।

हैरानी..विधायक-विभाग अब तक अनजान
ये दो बयान पढ़कर आप हैरान हो सकते हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी आलोक कुमार सिंह का कहना है कि यदि क्षेत्र में उच्च प्राथमिक विद्यालय की आवश्यकता है और निकट स्थित विद्यालयों की दूरी अधिक है तो इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। इसी तरह जब इगलास विधायक राजकुमार सहयोगी से पूछा तो उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी लेकर शासन स्तर पर विद्यालय खोलने का प्रस्ताव रखा जाएगा।

सवाल जो जवाब मांग रहे
  • एक लाख आबादी में एक भी जूनियर स्कूल क्यों नहीं?
  • 36 साल में विद्यालय खोलने का प्रस्ताव क्यों नहीं बना?
  • बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के बीच बेटियां पढ़ाई क्यों छोड़ रहीं?
  • खाली सरकारी जमीन होने के बावजूद निर्माण क्यों नहीं?
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