जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को एएमयू में बुलाने की तैयारी चल रही है। उनका आना तय है और जल्द ही पूरे कार्यक्रम की घोषणा कर दी जाएगी। विश्वविद्यालय की स्वायत्तता के बहाने वह छात्र-शिक्षकों को केंद्र के खिलाफ गोलबंद करेंगे। उनके साथ एएमयू छात्र संघ के कुछ पुराने नेता भी आ सकते हैं। सूचना मिलने के बाद एएमयू इंतजामिया के कान खड़े हो गए हैं।
केंद्र सरकार की नींद उड़ा देने वाले छात्र नेता कन्हैया कुमार को कुछ प्रबुद्ध शिक्षक एवं छात्र एएमयू में बुला रहे हैं। उनका आना तय माना जा रहा है। वह अप्रैल के पहले सप्ताह में किसी दिन (संभवत: 2 अप्रैल) एएमयू में आ सकते हैं। उनके साथ एएमयू छात्र संघ के कुछ पुराने नेता भी आ सकते हैं। वह एएमयू छात्र, शिक्षक एवं कर्मचारियों को संबोधित करेंगे। उनके भाषण के केंद्र में विवि की स्वायत्तता’ होगी। हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित शोध छात्र रोहित वेमुला समेत देश के दूसरे विश्वविद्यालयों में पिछले कुछ महीनों में घटित घटनाओं एवं छात्रों को ‘असहमति के अधिकार से वंचित’ करने के मुद्दों को वे मजबूती से उठा सकते हैं। उनके कार्यक्रम को लेकर एक टीम एएमयू का भ्रमण कर लौटी है।
कुछ छात्र एवं शिक्षकों को कार्यक्रम की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। छात्र, शिक्षक एवं कर्मचारियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया से टीम के सदस्य काफी उत्साहित हैं। मौजूदा समय में कन्हैया के एएमयू में आगमन को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह ऐसे समय में आ रहे हैं जब केंद्र सरकार एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप से संबंधित मसले पर सुप्रीम कोर्ट में अपना रुख बदलने का इरादा बदल चुकी है और यह मानने को तैयार नहीं है कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान है।
इस दृष्टि से भी कन्हैया की यात्रा महत्वपूर्ण है कि एएमयू के शिक्षक कुलपति के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में है। इसके अतिरिक्त अप्रैल के पहले पखवाड़े में एएमयू इसी एवं कोर्ट की मीटिंग है। इसमें एएमयू के नए कुलपति के पैनल पर मुहर लगने की उम्मीद है। इसके साथ एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप एवं कुलपति जमीरउद्दीन शाह की नियुक्ति से संबंधित मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है। एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह 5 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं 10 मार्च को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी से मिलकर एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप एवं केंद्रों को फंड देने समेत अन्य मसलों पर मदद की अपील कर के आए हैं।
कन्हैया के आगमन की सुगबुगाहट के बाद प्रॉक्टर आफिस के साथ खुफिया विभाग के लोग भी चौकन्ना हो गए हैं। प्रॉक्टर प्रो. एम मोहसिन खान का कहना है कि कन्हैया के आने के आने की चर्चा तो सुनी है, लेकिन किसी ने एप्रोच नहीं किया है।