जम्मू बस हादसे के 41 घायलों का उपचार जम्मू मेडिकल कॉलेज और अखनूर के सरकारी अस्पताल में हो रहा है। इसमें 18 लोगों को फ्रैक्चर हुआ है। किसी का पांव टूटा है तो किसी का हाथ। कुछ लोगों को छोटे तो कुछ को बड़े प्लास्टर बांधे गए हैं। 15 लोगों के शरीर में अलग-अलग चोटें हैं। आठ लोगों को मामूली चोट आई थी।
नाया गांव के मजरा धनीपुर के प्रवीण सिंह शुक्रवार सुबह 11 बजे कार से जम्मू पहुंचे और घायलों का हाल जाना। उनके परिवार के पांच लोग भी घायल हैं। इन सभी को तीन दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दी जाएगी। जम्मू के मेडिकल कॉलेज पहुंचे प्रवीण ने बताया कि हादसे में 18 लोगों को फ्रैक्चर हुआ है।
कुछ के हाथ-पांव टूट गए हैं। इसमें सात महिलाएं, छह पुरुष और पांच बच्चे शामिल हैं। गनीमत है कि कोई आईसीयू में नहीं है। उपचार की व्यवस्था निशुल्क है। खाना पीना भी निशुल्क दिया जा रहा है। तीमारदारों के लिए भी रहने और खाने का इंतजाम सरकार की ओर से किया गया है।
प्रवीण अपने भाई धमेंद्र चौधरी, ममेरे भाई सुनील चौधरी के साथ बृहस्पतिवार की शाम आठ बजे कार से जम्मू रवाना हुए थे, वह शुक्रवार सुबह 11 बजे जम्मू पहुंचे। उन्होंने बताया कि जो लोग मामूली रूप से घायल थे, उनमें से आठ लोगों को शुक्रवार शाम को छुट्टी दे दी गई है। अब वे वापस अलीगढ़ आने की तैयारी कर रहे हैं।
सुनीता और संजय के घरों में मातम
नाया गांव मृतकों में सुनीता पत्नी भगवान सिंह, सुनीता पत्नी रवेंद्र सिंह, संजय पुत्र सुंदर सिंह के घरों में भी मातम पसरा है। संजय पुत्र सुरेश के पैर में चोट लगी है, जिसका उपचार जम्मू में हो रहा है।
सुनीता व उनके पति भगवान सिंह दोनों एक साथ तीर्थयात्रा पर गए थे। इसमें सुनीता की मृत्यु हो गई। भगवान सिंह दिव्यांग हैं, उनका जम्मू में उपचार चल रहा है। इस दंपती के दो बेटे हैं। बड़ा पंकज (24) व जितेंद्र सिंह (21) गांव में ही हैं। मृतक समरजीत के परिवार और रिश्तेदारी के चार लोग कार से जम्मू गए थे, शुक्रवार को वह घटनास्थल पर पहुंच गए। उन्होंने भी घायलों से मिल कर उनका कुशलक्षेम जाना। गांव में लोगों को फोन कर सबका हाल बताया।