जम्मू में हुए बस हादसे में इगलास तहसील के गांव नाया के 12 लोगों की मौत के बाद युवाओं में गमगीन खामोशी है। गांव में आह, आंसू और अफसोस सब तरफ दिख रहा है। हर कोई गमजदा है। गांव में दो दिन से चूल्हे नहीं जल रहे हैं। बच्चों के लिए भी आस पड़ोस के गांव से खानेपीने का सामान भेजा जा रहा है।
पीड़ितों के रिश्तेदार और परिचित गांव में मृतक परिवारों के साथ हैं। वही उनकी देखभाल कर रहे हैं। लोगों का आना जाना लगा हुआ है। पीड़ित परिवारों की कुछ महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है। भीषण गर्मी के कारण कुछ महिलाओं की तबीयत भी खराब हो रही है।
हादसे की खबर मिलने के बाद से कई महिलाओं ने शुक्रवार शाम तक कुछ नहीं खाया था, इसलिए उनकी हालत खराब होने लगी थी। छोटे बच्चे भी परेशान हैं। किशोरवय किसी तरह खुद को संभाल पा रहे हैं। शुक्रवार को पूर्ति विभाग की टीम ने पीड़ित परिवारों तक खानेपीने का सामान पहुंचना शुरू कर दिया है, ताकि कोई बीमार न पड़े और गमगीन लोगों को कुछ सहारा दिया जा सके।
बस हादसे के बाद गांव के दस से ज्यादा लोग जम्मू गए थे, जो अब वापस आ रहे हैं। गांव के सभी व्यक्तियों के सवाल एक जैसे हैं कि घटना कैसे हुई..? आखिर इतने लोगों की जान कैसे गई..? उन्हें क्यों नहीं बचाया जा सका..? सरकार इस हादसे के बाद पीड़ितों की क्या मदद कर रही है..? मृतकों के आश्रितों का गुजारा अब कैसे होगा..? गांव के बुजुर्ग भी इस हादसे के बाद सदमे में हैं। कुछ ने अपने दोस्तों तो कुछ ने पड़ोसी और रिश्तेदारों को खो दिया है। यह बुजुर्ग अब शवों के आने की बाट जोह रहे हैं ताकि आखिरी बार उन्हें फिर से देख सकें।