अभी अलीगढ़ वासियों को और गर्मी झेलनी होगी, क्योंकि इस बार मानसून की दस्तक जिले में देर से होगी। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस देरी के बावजूद जिले में अच्छी बारिश होने की संभावना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मानसून के दस्तक देने का समय जून का आखिरी हफ्ता है।
मौसम विभाग ने इस बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छी बारिश होने की संभावना जताई है। बीते दस सालों में सबसे अधिक बारिश साल 2018 में दर्ज की गई थी। साल 2018 में 1647 मिलीलीटर बारिश हुई थी, जो वर्ष 2012 से वर्ष 2021 तक सबसे ज्यादा थी। आंकड़ों के अनुसार पिछले साल 2021 में भी 1159 मिलीलीटर बारिश दर्ज की गई थी। एएमयू के भूगोल विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सलेहा जमाल ने बताया कि जुलाई के तीसरे सप्ताह में अच्छी बारिश होने की संभावना है।
कृषि विज्ञान केंद्र छेरत के कृषि वैज्ञानिक डॉ. राम पलट ने बताया कि हर साल के औसत पर नजर डालें तो राष्ट्रीय स्तर पर 1100 मिलीलीटर की औसत बारिश होती है। इस बार भी पिछले साल की तरह अलीगढ़ में औसत से अधिक बारिश हुई तो खरीफ के साथ रबी की फसलों को लाभ होगा, क्योंकि सितंबर तक बारिश होने पर खेतों में अपेक्षित नमी बनी रहेगी, जिससे सरसों, लाही, गेहूं, दलहन और दूसरी फसलों में किसानों को सिंचाई की चिंता कम होगी। इधर, खरीफ में भी धान सहित दूसरी फसलों की सिंचाई लागत कम होगी और उत्पादन बेहतर होगा। प्री मानसून में अभी तक जून में मामूली बारिश हुई है।
पिछले दस साल में हुई बारिश
साल मिलीलीटर में
2012 640
2013 668
2014 489
2015 578
2016 1450
2017 277
2018 1647
2019 431
2020 282
2021 1159
2018 में हुई थी अच्छी बरसात
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2018 में पिछले 10 सालों में सबसे अधिक बरसात हुई थी। इस महीने 1647 मिली बारिश हुई थी। जुलाई 2016 में 1450 मिली बारिश हुई थी। 2021 में कुल 1159 एमएम बारिश हुई है। अगर दिन के हिसाब बारिश का औसत निकालें तो साल 2021 में सबसे कम दिनों में सबसे अधिक बारिश हुई है।
गर्मी बढ़ने का यह है कारण
एएमयू के भूगोल विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सलेहा जमाल बताती हैं कि पिछले कई साल से गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है, इस कारण बारिश भी कम होती है। शहर में छायादार जगहें और जिले में हरियाली क्षेत्र धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। इसका असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। इसके अलावा, दूसरी वजह बढ़ता प्रदूषण भी है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण गर्मी बढ़ रही है। कोरोना काल में गर्मी कम रही थी। इसका कारण था कम प्रदूषण। लॉकडाउन के दौरान इंडस्ट्रियल एरिया बंद थे। सड़क पर भी वाहनों की संख्या कम थी। लॉकडाउन खत्म होने के बाद फिर से प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। शहरीकरण भी प्रदूषण बढ़ने की अन्य वजह है। लोग गांव देहात से शहर का रुख कर रहे हैं।
डॉ. सलेहा जमाल- फोटो : CITY OFFICE