कॉलर को थोड़ा ऊपर चढ़ाके, सिगरेट के धुएं का छल्ला उड़ाके...। हिंदी फिल्म का यह गीत आज के दौर में टीनएजर्स व युवाओं पर सटीक बैठता है। आलम ये है कि खेलने कूदने और दुनियादारी को समझने की उम्र में ही पीढ़ी नशे के चंगुल में फंसती जा रही है। चाहे काफी हाउस हों या हुक्का बार या चाय की टपरी। हर तरफ किशोर व युवा सिगरेट से धुआं उड़ाते दिखाई दे जाते हैं। इतना ही नहीं, उस सिगरेट की आड़ में गांजा भरकर सुट्टा मारने का चलन बढ़ता जा रहा है।
इस मुद्दे पर जिला अस्पताल की साइकोथेरेपिस्ट, पीएसडब्ल्यू डॉ.अंशू सोम ने बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इस पर विराम के लिए सिस्टम से कहीं ज्यादा समाज व माता-पिता की जिम्मेदारी है। वे अगर शुरुआत में अंधविश्वासी होंगे तो आगे बड़ी परेशानी से दो-चार होंगे। इसलिए जरूरत है शुरुआत में ही ठोस कदम उठाने की, ताकि आगे बड़ी परेशानी से बचा जा सके।
नशे की लत में आए टीनएजर्स, युवाओं व बड़ों को बाहर लाने के लिए लगातार कई साल से काउंसिलिंग कर रहीं डॉ.अंशू सोम अमर उजाला से बातचीत में कहती हैं कि नशा एक बीमारी है। इस बीमारी के लगने के बाद चार प्रमुख बातें सामने आती हैं। पहली फ्रेमिंग मतलब नशे की आदत का न छूटना। दूसरा टॉलरेंस मतलब इसकी क्षमता बढ़ते जाना। तीसरी रोक न पाना, मतलब यह जानते हुए कि नुकसान हो रहा है पर उससे दूरी नहीं हो पाती। चौथी आपराधिक व्यवहार हो जाना, मतलब इसकी लत पूरी करने के लिए किशोर या युवा झूठ बोलने लेकर चोरी करने तक जैसी किसी भी हद तक जा सकता है।
डॉ.अंशू के अनुसार, नशा दो वजहों से लगता है, पहला परिस्थिति और दूसरा अचानक से। टीनएजर्स व युवा हमेशा दोस्तों या अपने किसी बड़े को देखकर उसके साथ रहकर अचानक नशे की गिरफ्त में आते हैं। नशे की गिरफ्त में आने के बाद उनकी टॉलरेंस पावर बढ़ती है। फिर मन:स्थिति में बदलाव पैदा होते हैं। नशा न मिलने पर गुस्सा, चिड़चिड़ापन, शांत रहना होने के साथ साथ भूख न लगने और पेट साफ न होने की बीमारी भी शुरू हो जाती है।
वे कहती हैं कि किसी बच्चे में यह लत लग गई है तो परिवार सख्ती के साथ उदार रवैया अपनाए, पर अंधविश्वासी न बने। वरना इसको कोडिपेंडेंसी यानि एक सहयोगी मिल जाता है। उदाहरण के तौर पर वे कहती हैं, कभी मां यह कहती हैं कि चलो कोई बात नहीं, आगे से ऐसा नहीं होगा। तो कभी पिता यह कहते हैं तो बच्चा इसे अपना बचाव मानने लगता है। वे कहती हैं, कि हर स्थिति में बच्चे को सुना जाए। फिर समझकर उदारता दिखाते हुए उसके प्रति सजा तय की जाए। तभी उसे किसी भी लत से बचाया जा सकता है। वे अपने दो केस बताती हैं, जिनमें एक बिगड़ने के बाद उनके पास आया। दूसरा बिगड़ने पर उन्होंने सुधारा।
केस-1
मध्यमवर्गीय परिवार में छोटा बेटा नशे की गिरफ्त में दोस्तों के साथ आया। धीरे-धीरे वह आदि हो गया और फिर बीमार होने लगा। आगे चलकर उसे दौरे पड़ने लगे। वह झूठ बोलने, जिद करने, दबंगई दिखाने जैसी हरकतें भी करने लगा। अब बीमारी में परिवार परेशान है। हालांकि प्रयास किया जा रहा है कि सुधारा जा सके। अगर इसे शुरू में देखा जाता तो शायद आज यह समस्या न आती।
केस-2
इगलास का एक दवा वितरक नशे की गिरफ्त में इस कदर आया कि परिवार टूटने के कगार पर पहुंच गया। पत्नी बच्चों से झगड़ा। व्यापार न देखने के कारण व्यापार पर परिवार के अन्य लोगों का कब्जा होने लगा। महिला ने उम्मीद छोड़ दी और कहने लगी कि बच्चे के समझदार होने पर अलग हो जाएगी। उनके संपर्क में आने पर डेढ़ साल के प्रयास में अब सुधार है। पति पत्नी दोनों बेहद खुश हैं और साथ रह रहे हैं।
नशे की लत के कारण करने लगे क्राइम
डॉ. अंशू जिला कारागार में भी बंदियों की काउंसिलिंग के लिए जाती हैं। वे बताती हैं कि जेल में आने वाले टीनएजर्स से युवा में 70 फीसदी नशे के कारण अपराध की गिरफ्त में आए हैं। जेल आने के बाद वे खुद परेशान हैं और बाहर उनके परिवार परेशान हैं। शुरुआत में परिवार ने ध्यान नहीं दिया। अब वे नशे की लत पूरा करने के लिए क्राइम करने लगे। यहां तक पहुंच गए।
नारकोटिक्स सेल का पुनर्गठन, लगेगी नशा उत्पादों पर लगाम
जहरीली शराब कांड के दंश से उबर रहे जिले के लिए अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस पर एसएसपी ने विशेष घोषणा की है। उन्होंने अमर उजाला के सुझाव पर जिले में नारकोटिक्स सेल का पुनर्गठन करते हुए इंचार्ज की तैनाती की है। साथ में लोगों से सहयोग मांगते हुए कहा है कि वे पुलिस के एंटी क्राइम हेल्पलाइन नंबर पर नशा उत्पाद बिक्री की सूचनाएं देंगे तो नारकोटिक्स सेल सख्ती से कार्रवाई करेगा।
एसएसपी कलानिधि नैथानी ने चर्चा के दौरान नारकोटिक्स सेल के पुनर्गठन के निर्देश दिए। साथ में उसके प्रभारी के रूप में इंस्पेक्टर नईम अहमद की तैनाती की है। एंटी क्राइम हेल्पलाइन नंबर 9454402817 उसकी सूचनाओं के लिए नंबर निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि जनपद में नशीले/मादक पदार्थों के दुरुपयोग और तस्करी रोकने के लिए नारकोटिक्स सेल का पुनर्गठन किया गया है। जिसमें प्रभारी व तीन अन्य पुलिस कर्मचारीगण नियुक्त किए गए हैं। अब तक सिर्फ एक मुख्य आरक्षी काम देख रहे थे। इसमें जरूरत पड़ने पर फील्ड यूनिट, अभिसूचना इकाई, सर्विलांस सेल, स्वॉट टीम की भी मदद दी जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि अपने मोहल्ले में बिकने वाले मादक पदार्थ के विषय में जानकारी दें। यह टीम तत्काल कार्रवाई करेगी।
-ये चार लोग होंगे सेल के निशाने पर
1- प्रोड्यूसर
2- सप्लायर
3- कैशियर
4- डिस्ट्रीब्यूटर एवं यूजर आदि।
- ढाई माह में नशा तस्करों पर कसा शिकंजा
- 88 नशा उत्पाद तस्कर गिरफ्तार कर 89 मुकदमे दर्ज किए गए
- 18 किलो 341 ग्राम नशीला पदार्थ इन तस्करों से जब्त किया
- 5 क्विंटल 346 किलो स्मैक इन नशा तस्करों से जब्त की गई है
जिले को दंश देने वाले जहरीली शराब कांड पर चलाया चाबुक
मई माह के अंत में जहरीली शराब कांड ने जिले को तगड़ा दंश दिया है। 109 मौतों से पूरा जिला हिल गया। हालांकि इस कांड के बाद एसएसपी कलानिधि नैथानी की अगुवाई में हुई कार्रवाई में शराब सिंडिकेट पर चाबुक चला है। अकेले इस कांड में 25 मुकदमों में 77 गिरफ्तारी पिछले 25 दिन में हुई हैं और 7 अवैध शराब फैक्टरी पकड़ी गई हैं। सियासी संरक्षण में फल फूल रहे शराब सिंडिकेट को जड़ से नेस्तनाबूत करने पर काम चल रहा है। इसी तरह अगर पिछले ढाई माह के एसएसपी के कार्यकाल पर गौर करें तो अवैध शराब बिक्री के मामलों में 309 मुकदमों में 392 गिरफ्तारी हुई हैं। 50 हजार लीटर शराब व 9 शराब भट्ठी जब्त की गई हैं।
गली मोहल्लों में पुड़ियों में गांजा बिकने पर नपेंगे एसओ
एसएसपी कलानिधि नैथानी बताते हैं कि उनके स्तर से नशा उत्पाद की बिक्री को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। यह नशा ही अपराध की मूल जड़ होता है। किसी भी जिले में अगर इस तरह का नशा बिकना बंद हो जाए तो अपराध का ग्राफ खुद ब खुद गिर जाता है। उन्होंने कहा कि वे शुरुआत से ही थाना प्रभारियों को सख्त हिदायत देते आ रहे हैं कि अगर गली मोहल्लों में पुड़ियों में गांजा बिकने की शिकायत मिली तो सीधे एसओ व चौकी प्रभारी पर कार्रवाई होगी। हाल ही में दो एसओ के खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं। इसी शिकायत को रोकने के लिए एंटी क्राइम हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है।
शहर के ये इलाके बदनाम
गांजा व अन्य तरह के नशीले पदार्थों की बिक्री के लिए शहर में बेगमबाग, चंदनिया, नौरंगाबाद, डोरी नगर, जयगंज, भुजपुरा, सासनी गेट, पला साहिबाबाद, हाथरस अड्डा, देहली गेट का इंदिरा नगर, नगला मसानी, जलालपुर, जीवनगढ़, नगला पटवारी आदि इलाके बदनाम हैं।