प्राचीन तालों से लेकर साइबर लॉक तक का सफर दिखेगा
लॉक म्यूजियम में अलीगढ़ के करीब 100 साल पुराने ताला उद्योग की यात्रा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। यहां आकर्षक की-होल प्रवेश द्वार, विशाल लॉक स्कल्पचर, डिजिटल ओरिएंटेशन डोम, प्राचीन ताला निर्माण कार्यशाला के प्रतिरूप और औपनिवेशिक काल के व्यापार एवं निर्यात से जुड़ी प्रदर्शनी होगी। इसके अलावा स्मार्ट लॉक, बायोमेट्रिक, फेस रिकॉग्निशन और साइबर सिक्योरिटी पर आधारित इंटरैक्टिव गैलरी भी बनाई जाएगी। पारंपरिक कारीगरों की विरासत, उनकी जीवनगाथा और लोककथाओं को भी जगह मिलेगी।
म्यूजियम में बच्चों के लिए किड्स जोन, डिजिटल गतिविधियां, की-एनग्रेविंग स्टेशन, काइनेटिक लॉक स्कल्पचर, थीम आधारित कैफे और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य म्यूजियम को इतिहास, तकनीक, शिक्षा, मनोरंजन और पर्यटन के एकीकृत केंद्र के रूप में विकसित करना है।
नगर आयुक्त ने बताया कि अलीगढ़ का ताला उद्योग लगभग चार हजार करोड़ रुपये का है। लॉक म्यूजियम बनने से देश-विदेश से आने वाले उद्यमियों और खरीदारों को अलीगढ़ के ताला उद्योग, उत्पादों और तकनीक को एक ही स्थान पर देखने का अवसर मिलेगा। हैरिसन, गोदरेज और लिंक लॉक जैसी कंपनियों के साथ भी संपर्क स्थापित कर उनके उत्पादों की गैलरी बनाने की योजना है। जेवर एयरपोर्ट से आने वाले अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए भी यह केंद्र उपयोगी साबित हो सकता है।
नगर आयुक्त के अनुसार, परियोजना की डीपीआर अनुभवी कंसल्टेंट से तैयार कराई जाएगी। बेहतर डिजाइन तय करने के बाद उसे शासन को भेजा जाएगा। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। अगले छह से सात माह में निर्माण शुरू होने की संभावना है।
उद्योग और रोजगार को मिलेगी नई दिशा
सांसद सतीश गौतम ने परियोजना की स्वीकृति को अलीगढ़ की औद्योगिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। महापौर प्रशांत सिंघल ने कहा कि म्यूजियम बनने से अलीगढ़ में देश-विदेश के पर्यटकों, व्यापारियों और विद्यार्थियों का आगमन बढ़ेगा। कोल विधायक अनिल पाराशर ने कहा कि इससे पारंपरिक ताला उद्योग को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ नई पहचान मिलेगी। तत्कालीन मंडलायुक्त संगीता सिंह ने भी परियोजना की स्वीकृति पर प्रसन्नता जताते हुए इसे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने वाली पहल बताया।