महानगर से सटी 19 ग्राम पंचायतों के नगर निगम की सीमा में शामिल होने से महानगर का दायरा तो बढ़ गया है, लेकिन सुविधाएं नहीं बढ़ी हैं। इसका स्पष्ट उदाहरण है स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल सारसौल इलाका। यहां चौराहे की सड़क जर्जर है। गहरे गहरे गड्ढे हैं और टूटकर डिवाइडर का टुकड़ा रह गया है। रात्रि में कम दृश्यता के चलते इस डिवाइडर से टकराकर वाहन पलट रहे हैं।
अंदरूनी इलाके में भी टूटी सड़कों, टूटी नालियों और सड़कों पर जलभराव की स्थिति है। सफाई कर्मी आते नहीं हैं। इससे समूचे क्षेत्र की नालियां सिल्ट से अटी हैं। गंदगी का अंबार लगा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब ग्राम पंचायत थी, तब सफाई हो जाती थी और विकास कार्य भी। नगर निगम की सीमा में आने के बाद दो सालों से यहां कुछ नहीं हुआ है।
- सारसौल चौराहे पर सड़क में गहरे गड्ढेेे हैं। डिवाइडर टूट चुका है। अब उसका टुकड़ा रह गया है। रात में कम दृश्यता के चलते चार पहिया वाहन पलट जाते हैं। तमाम शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
- विशाल शर्मा
- गांव में नालियां सिल्ट से अटी पड़ी हैं। सड़कों पर जलभराव है। बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। तमाम शिकायतों के बावजूद नगर निगम के किसी अफसर ने कार्रवाई तो दूर निरीक्षण तक उचित नहीं समझा है।
- शरद बंसल
- क्षेत्र में नालियां टूटी पड़ी हैं। तमाम शिकायतों व सफाईकर्मी तैनाती के दावों के बावजूद सफाईकर्मी आते नहीं हैं। जगह जगह कूड़े के ढेर बीमारियों को न्योता दे रहे हैं। तमाम शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई है।
-धर्मेंद्र
- हमारा गांव स्मार्ट सिटी में शामिल है। लेकिन चहुंओर अव्यवस्थाएं हैं। कोई काम नहीं हुआ है। चौराहे पर लाइटें नहीं लगी हैं, जो लगी हैं, वे भी लंबे समय से खराब पड़ी हुई हैं। शिकायत करो तो अफसर मात्र आश्वासन देते हैँ।
-राधेश्याम