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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: हाथ में था मोबाइल, एआई से बना दी पिस्टल, एक साल पुराना फोटो बना गले की फांस

Sun, 30 Aug 2026 10:52 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

गभाना में रोडवेज बस स्टैंड के पास जनसेवा केंद्र चलाने वाले शशांक कुमार ने करीब एक साल पहले रक्षाबंधन के अवसर पर मोबाइल हाथ में लेकर सोमना रेलवे स्टेशन पर एक तस्वीर खिंचवाई थी। एक साल बात किसी शरारती तत्व ने इस फोटो में मोबाइल की जगह पिस्टल दिखा दी।
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असली फोटो में मोबाइल और एआई से हाथ में पिस्टल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जहां तकनीक की दुनिया को आसान बना रहा है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल लोगों के लिए खतरा भी बनता जा रहा है। ऐसा ही एक मामला गभाना में सामने आया। युवक के हाथ में मोबाइल था, लेकिन एआई से किसी ने उसे पिस्टल बना दिया। तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो युवक परेशान हो गया। इस दौरान उसे पुलिस और समाज के सवालों का सामना करना पड़ा।

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गभाना में रोडवेज बस स्टैंड के पास जनसेवा केंद्र चलाने वाले शशांक कुमार ने करीब एक साल पहले रक्षाबंधन के अवसर पर मोबाइल हाथ में लेकर सोमना रेलवे स्टेशन पर एक तस्वीर खिंचवाई थी। एक साल बात किसी शरारती तत्व ने इस फोटो में मोबाइल की जगह पिस्टल दिखा दी। जैसे ही यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई शशांक रातों-रात पुलिस के रडार पर आ गए। उनसे पिस्टल के बारे में पूछताछ शुरू हो गई।

उधर, कस्बे में भी जो जिसे मिलता, वही शशांक से पूछने लगता भाई, फोटो में ये हाथ में क्या ले रखा है। लगातार हो रही पूछताछ और लोगों के सवालों से परेशान होकर शशांक की मानसिक स्थिति खराब होने लगी। शशांक ने सूझबूझ से काम लिया और अपनी पुरानी यादों को खंगाला। उन्होंने पुलिस के सामने वही एक साल पुराना असली फोटो पेश किया। पुलिस ने जब दोनों तस्वीरों का मिलन किया और तकनीकी जांच की तो साफ हो गया कि शशांक बेकसूर हैं और किसी ने एआई का गलत इस्तेमाल करके उन्हें बदनाम करने की साजिश रची है।
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सीओ महेश कुमार ने बताया कि इस तरह की हरकत और फोटो वायरल करने वाले शरारती तत्व की पहचान की जा रही है। साइबर सेल की मदद से आरोपी का पता लगाया जा रहा है। जल्द ही उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस तरह करें एआई से बनी तस्वीरों की पहचान

  • एआई से बनी तस्वीरों में अक्सर तकनीक की कुछ सीमाएं रह जाती हैं, जिन्हें गौर से देखने पर आसानी से पकड़ा जा सकता है।
  • एआई जेनरेटेड तस्वीरों में इंसानी उंगलियों या हाथों की बनावट अक्सर अजीब होती है ,जैसे अतिरिक्त उंगलियां दिखना या उंगलियों का मुड़ाव गलत होना।
  • यदि आपको किसी तस्वीर पर संदेह है, तो उसे गूगल लेंस या टिन आई जैसे रिवर्स इमेज सर्च इंजन पर अपलोड करके देखें। इससे आपको यह पता चल जाएगा कि वह तस्वीर मूल रूप से कब और कहां की है, या क्या उसे एडिट किया गया है।
  • आज कई ऐसे ऑनलाइन टूल्स और सॉफ्टवेयर आ चुके हैं जो यह पहचान सकते हैं कि कोई फोटो असली है या एआई द्वारा बनाई गई है
  • अगर आपके साथ फर्जी तस्वीर की घटना हुई है तो जिले के साइबर क्राइम सेल या नजदीकी पुलिस स्टेशन पर सूचना दें।
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