किसान ने निजी ट्यूबवेल के लिए बिजली कनेक्शन का आवेदन किया था। करीब तीन लाख रुपये एस्टीमेट राशि जमा कराई गई। विभाग ने मौके पर डबल पोल और ट्रांसफार्मर भी लगा दिया, लेकिन लाइन चालू नहीं की गई। चेकिंग के नाम पर उसके खिलाफ बिजली चोरी की कार्रवाई करते हुए 4,50,583 रुपये का प्रोविजनल असेसमेंट थमा दिया गया।
अलीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बिजली विभाग को झटका देते हुए किसान पर लगाए गए 4,50,583 रुपये के प्रोविजनल असेसमेंट को रद्द कर दिया। आयोग ने मानसिक उत्पीड़न के लिए विभाग को 50 हजार रुपये मुआवजा और 25 हजार रुपये वाद खर्च देने का आदेश दिया है। साथ ही तत्कालीन एक्सईएन अखिलेश कुमार समेत संबंधित अधिकारियों पर रिश्वत मांगने के आरोपों की विभागीय जांच कराने के निर्देश दिए हैं। आदेश का पालन 30 दिन में करना होगा।
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हाथरस जिले के सुसायत कलां गांव निवासी पीयूष अग्रवाल के दिवंगत पिता महेश अग्रवाल ने 2018 में कृषि भूमि पर 10 बीएचपी के निजी ट्यूबवेल के लिए बिजली कनेक्शन का आवेदन किया था। इसके लिए करीब तीन लाख रुपये एस्टीमेट राशि जमा कराई गई। विभाग ने मौके पर डबल पोल और ट्रांसफार्मर भी लगा दिया, लेकिन लाइन चालू नहीं की गई।
शिकायत के मुताबिक, तत्कालीन अधिशासी अभियंता अखिलेश कुमार और जूनियर इंजीनियर ने कनेक्शन चालू करने के नाम पर एक-एक लाख रुपये रिश्वत मांगी। किसान ने रकम देने से इनकार किया तो 5 मार्च 2018 को चेकिंग के नाम पर उसके खिलाफ बिजली चोरी की कार्रवाई करते हुए 4,50,583 रुपये का प्रोविजनल असेसमेंट थमा दिया गया। महेश अग्रवाल ने कार्रवाई के खिलाफ अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन मामला नहीं सुलझा। इसी दौरान 7 दिसंबर 2020 को उनका निधन हो गया। इसके बाद बेटे पीयूष अग्रवाल ने कानूनी लड़ाई जारी रखी।
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आयोग के अध्यक्ष हसनेन कुरैशी, सदस्य आलोक उपाध्याय और पूर्णिमा सिंह राजपूत की पीठ ने मामले की सुनवाई में पाया कि चेकिंग के दौरान मौके की वीडियोग्राफी नहीं कराई गई और उपभोक्ता को सुनवाई का उचित अवसर भी नहीं दिया गया। आयोग ने असेसमेंट को अवैध मानते हुए पूरा बिल रद्द कर दिया।