मिशन शक्ति अभियान के तहत एडीजे प्रथम शाहिद रजा के न्यायालय से दहेज हत्या के मुकदमे में आरोपी पति को दस साल की सजा व जुर्माने से दंडित किया है। इस मामले में आरोपी के दो भाइयों को बरी किया गया है। खास बात है कि मुकदमे में विवाहिता की हत्या कर शव बिटौरे में रखकर जलाने का आरोप है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी अमर सिंह तोमर के अनुसार हाथरस के सादाबाद क्षेत्र के गांव एदलपुर के नत्थी सिंह ने इगलास में मुकदमा दर्ज कराया कि उन्होंने अपनी बेटी संगीता की शादी 20 जनवरी 2003 को इगलास के फतेहपुर के चंद्रवीर उर्फ बबलू संग की। शादी के बाद से ही बेटी को दहेज के लिए परेशान किया जाने लगा।
इस बीच वादी ने कहे अनुसार पांच बार में ढाई लाख रुपया भी दिया। फिर उससे एक लाख रुपये मांगे जाने लगे। इसी के चलते 23 जनवरी 2009 को उसकी बेटी की हत्या कर दी गई। जब वादी को खबर मिली और वे मौके पर पहुंचे तो बेटी के शव को पड़ोस के गांव के बिटौरे में रखकर जलाया जा रहा था। किसी तरह ग्रामीणों की मदद से अधजला शव निकाला गया। खबर देकर पुलिस बुलाई गई। मुकदमे में पति चंद्रवीर के अलावा उसके दो भाई, मां व दो किशोर रिश्तेदार आरोपी बनाए गए। सत्र परीक्षण के दौरान किशोर आरोपियों की पत्रावली अलग कर दी गई, जबकि मां की मौत हो गई। न्यायालय ने साक्ष्यों व गवाही के आधार पर पति को दस साल कैद व 20 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है, जबकि उसके दो भाइयों को बरी कर दिया है।