पं. हृदय रंजन शर्मा।
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इस बार होलिका दहन के लिए 17 मार्च को शाम 06:39 से लेकर रात 10:15 बजे तक शुभ मुहूर्त है। इस बार भद्रा के दौरान ही होलिका दहन होगा। लेकिन यह होलिका दहन अशुभ नहीं माना जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार निशीथ काल तक रहने वाली भद्रा के मुंह को छोड़कर और निशीथ काल से पहले होलिका दहन किया जा सकता है।
श्री गुरू ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि 17 मार्च को दिन में चतुर्दशी तिथि समाप्त हो रही है और पूर्णिमा लग जाएगी। इसी दिन होलिका दहन होना है। भद्रा में होलिका दहन करना वर्जित माना गया है। लेकिन शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि यदि भद्रा निशीथ काल के बाद तक रहे तो ऐसी स्थिति में भद्रा का मुंह छोड़कर निशीथ काल से पहले होलिका दहन कर सकते हैं। इस बार भद्रा का मुंह दिन में ही निकल आएगा। इससे प्रदोष काल में ही होलिका दहन किया जाना शास्त्रोक्त रहेगा। जिसके अनुसार 17 मार्च को शाम 06:39 से लेकर 10:15 तक होलिका दहन किया जा सकता है।