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हिंदी हैं हमः हिंदी साहित्य में छिपा है जीवन का सार : मालपाणी

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राकेश कुमार मालपाणी । एडीएम सिटी । - फोटो : CITY OFFICE
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हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं है, यह मातृ भाषा है, इसमें भाव है। वर्तनी बेहद समृद्ध है। वर्णमाला में स्वर और व्यंजन का प्रयोग वैज्ञानिक है। हिंदी ने विदेशी शब्दों को भी ग्रहण किया है। बच्चा सबसे पहले मां शब्द का उच्चारण सीखता है। इसीलिए मां और मातृभाषा उसके जीवन में पहला स्थान रखती है। हिंदी साहित्य में जीवन का सार छिपा है। हिंदी के प्रति यह विचार हैं आईएएस अधिकारी राकेश कुमार मालपाणी के, जिन्होंने हिंदी से पढ़ाई करने के बाद देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा में मुकाम हासिल किया।
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अमर उजाला फाउंडेशन के अभियान ‘हिंदी हैं हम’ के तहत एडीएम सिटी राकेश कुमार मालपाणी ने बताया कि 1998 में पीसीएस अधिकारी के तौर पर नौकरी शुरू की। हाल में उन्हें सरकार ने आईएएस कैडर में प्रोन्नत किया है। राकेश कुमार मालपाणी मूलरूप से जयपुर (राजस्थान) के मारवाड़ी व्यावसायिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। परिवार व्यवसाय के सिलसिले में पीलीभीत जिले में आकर बस गया। उन्होंने वहीं से 12 तक की शिक्षा हिंदी माध्यम से ग्रहण की।
उन्होंने बताया कि यूपी बोर्ड की 10वीं औैर 12वीं की परीक्षा में हिंदी विषय में 75 फीसदी से अधिक अंक अर्जित किए। पीसीएस की मुख्य परीक्षा में विषय हिंदी साहित्य को चुना और 69 अंक प्राप्त किए। वह हिंदी के प्रति लगाव का श्रेय अपने गुरु रूप नारायण सक्सेना को देते हैं। उन्होंने बताया कि गुरु ने ही उनके भीतर हिंदी से लगाव की अलख जलाई। उन्होंने बताया कि हिंदी के लेखक जयशंकर प्रसाद की रचना कामायिनी, मुंशी प्रेमचंद की गोदान, महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की रचना राम की शक्ति पूजा से जीवन में बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
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