नारी विमर्श, दलित विमर्श और नई कहानी के प्रतिनिधियों में शामिल प्रसिद्ध लेखक राजेंद्र यादव का अलीगढ़ से विशेष लगाव था। वह यहां अक्सर आते रहते थे। यहां के नए लेखकों को प्रोत्साहित करते थे। यहां के कई लेखकों और साहित्यकारों के हृदय में उनकी स्मृतियां आज भी जीवंत हैं। 28 अगस्त को उनके जन्मदिन पर गजलकार सुरेश कुमार ने उनसे जुड़े संस्मरण साझा किए हैं।
सुरेश कुमार बताते हैं कि राजेंद्र यादव अलीगढ़ के साहित्यकार और लेखकों के निरंतर संपर्क में रहते थे। उनको दिल्ली आमंत्रित करते थे और उनकी रचनाओं को पत्रिका हंस में स्थान देते थे। बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि राजेंद्र यादव ने एक कविता संग्रह ‘आवाज तेरी है’ भी लिखा। एक बार जब वह राजेंद्र यादव से दिल्ली में मिले तो यूं ही बातों बातों में उन्होंने कहा आप तो ग़जलकार हैं, मेरी भूमिका तो कहानी की खुरदुरी जमीन है। इस पर सुरेश कुमार ने याद दिलाया कि आपने अपनी लेखन यात्रा के शुरुआती दौर में ‘आवाज तेरी है’ नाम से कविता संग्रह लिखा था।
इस पर राजेंद्र यादव आश्चर्यचकित हो गए और बोले क्या, आप मुझे यह प्रति उपलब्ध करा सकते हैं। अपनी मृत्यु से मात्र 15 दिन पहले राजेंद्र यादव ने फिर से सुरेश कुमार को फोन करके ‘आवाज तेरी है’ कविता संग्रह की प्रति मांगी थी। सुरेश कुमार जब तक उस दुर्लभ प्रति की खोज कर पाते, तब तक वह अनंत यात्रा पर रवाना हो चुके थे।
सुरेश कुमार बताते हैं कि इसी तरह एक और घटना अलीगढ़ में हुई। उन्हें एक क्लब के कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। कुछ विरोधियों ने उन्हें भड़का दिया कि यह क्लब अमीरों का है। इसमें सामाजिक चिंतन के लिए कोई स्थान नहीं। इसके बाद राजेंद्र यादव ने आयोजकों को फोन करके कहा कि वह स्वास्थ्य कारणों से इस कार्यक्रम में नहीं आ सकते। बाद में इस कार्यक्रम में राजेंद्र यादव की जगह पद्मभूषण गोपालदास नीरज को बुला लिया गया, लेकिन कार्यक्रम में बैनर राजेंद्र यादव के नाम का ही लगा रहा। इस कार्यक्रम के कई वर्ष बाद उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि कुछ लोगों द्वारा गुमराह करने के चलते वह इस कार्यक्रम में नहीं आ सके थे। लेकिन उन्होंने खुशी जाहिर की थी कि गोपालदास नीरज वहां पहुंच गए थे और बैनर की शक्ल में ही सही वह वहां मौजूद रहे थे।
सुरेश कुमार।- फोटो : CITY OFFICE