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हिंदी हैँ हम : हिंदी बने जन-जन की भाषा, यही है अभिलाषा

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डॉ. फातिमा जेहरा। - फोटो : CITY OFFICE
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हिंदी निरीह भाषा नहीं है, बल्कि एक वैज्ञानिक व समृद्ध भाषा है। वह दिन दूर नहीं, जब हिंदी जन-जन की भाषा बनेगी। बशर्ते, हिंदी को लेकर अपनी सोच बदलनी होगी। ये बातें शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन के अभियान ‘हिंदी हैं हम’ के तहत ‘हिंदी के उत्थान में हमारा योगदान’ विषय पर आयोजित वेबिनॉर में शिक्षकों ने कही। अलग-अलग शैक्षणिक संस्थाओं के शिक्षकों ने हिंदी के उत्थान की शुरुआत अपने घर और विद्यालय से करने पर जोर दिया। चर्चा में शामिल शिक्षकों को ‘श्रेष्ठ हिंदी शिक्षक’ सम्मान से सम्मानित किया गया।
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हिंदी भाषा के मर्म को समझना होगा। जिस दिन यह हो गया, उस दिन हिंदी अस्मिता की भाषा बन जाएगी। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए एक माहौल तैयार करना होगा, जिसकी जिम्मेदारी शिक्षकों की है। अपने ही हिंदी को ठिकाने लगाने में तुले हैं। रही-सही कसर मोबाइल टाइपिंग ने पूरी कर दी। सुंदर, अच्छा को रोमन में लिखने लगे हैं।
- डॉ. चंद्रशेखर शर्मा, शिक्षक, ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल
हिंदी भाषा पर सबको गर्व करना चाहिए। अगर हिंदी को हमने प्राथमिकता नहीं दी तो दूसरों से अपेक्षा करना बेमानी होगी। हिंदी ने रोजगार के दरवाजे भी खोले हैं। हिंग्लिश ने हिंदी के स्वरूप को बदलने में खलनायक की भूमिका निभाई है। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए हिंदी के प्रचलित शब्दों का प्रयोग होना चाहिए। हिंदी में संवाद बेहतर है।
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-डॉ. अशोक अंजुम, शिक्षक, संत फिदेलिस स्कूल
हिंदी एक वैज्ञानिक, समृद्ध, संपन्न भाषा है। हिंदी भाषा की विशेष बात यह है कि हिंदी की बोली व लिखावट एक जैसी है। हिंदी के बढ़ावे के लिए विद्यालय में प्रतियोगिताएं होनी चाहिए। हिंदी को दैनिक जीवन में प्रयोग करना चाहिए। हिंदी की एक और खास बात है, क्योंकि वह सबको अंगीकार कर लेती है।
- डॉ. दिनेश कुमार शर्मा, प्रधानाचार्य, हिंदू इंटर कॉलेज
हिंदी का उत्थान बेहतर तरीके से तभी हो सकता है, जब उसे अर्थ से जोड़ दिया जाए, क्योंकि भौतिकवादी युग में अर्थ महत्वपूर्ण है। अपने अंदर हिंदी को लेकर एक प्रेम की अलख जगानी होगी। हिंदी एक सम्मान की भाषा है। हिंदी के शब्द को सहज-सरल प्रयोग करेंगे तो यकीन मानिए हिंदी का स्तर जल्द ही ऊंचा उठ जाएगा।
-डॉ. संजय कुमार, प्रधानाचार्य, एलबीएस इंका इगलास
हिंदी को आर्थिक पक्ष से जोड़ना होगा। विद्यालयीय स्तर पर बच्चों को हिंदी में बेहतर भविष्य की बातें बताई जाएं तो उनका रुझान हिंदी की तरफ बढ़ेगा। हिंदी विषय में महारत हासिल करने वालों के लिए नौकरी की दिक्कत नहीं हैं। अंग्रेजी जरूरत हो सकती है, लेकिन उसे अपने ऊपर हौव्वा मत बनने दीजिए। हिंदी की प्रगति के बारे में सोचें।
- डॉ. जीएफ साबरी, असिस्टेंट प्रोफेसर एएमयू
हिंदी का स्तर उठाने के लिए अपने घर से ही शुरुआत करनी चाहिए। बच्चों में हिंदी की रुचि पैदा करनी होगी। हिंदी को कक्षा 12 तक अनिवार्य होना चाहिए। हिंदी भाषा जन-जन की भाषा है। हर किसी की यही अभिलाषा होती है कि हिंदी का सम्मान देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में होना चाहिए। हिंदी केवल भाषा नहीं, मातृ भाषा है।
-डॉ. फातिमा जेहरा, शिक्षिका, अलीगढ़ पब्लिक स्कूल
हिंदी को वो दर्जा आज तक नहीं मिल पाया है, जिसकी प्रतीक्षा है। अलबत्ता, हिंदी उपेक्षा की शिकार जरूर हो गई। हिंदी को पढ़ना चाहिए, क्योंकि यह एक ऐसी भाषा है, जो समाज को भावनात्मक रूप से जोड़ती है। अंग्रेजी शब्द को हिंदी भाषा के साथ मिला देने से हिंदी भाषा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जो बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
-डॉ. वीपी शाही, शिक्षक, लगसमा इंटर कॉलेज गोंडा
हिंदी को प्रोत्साहन मिलना चाहिए। हिंदी का जो हाल है, उसके पीछे एक इतिहास है। हिंदी भाषा को एक दिन के लिए निर्धारित कर दिया गया है, जबकि हिंदी हमारे लिए 365 दिन की है। हिंदी को वास्तविक दर्जा दिलाने के लिए अमर उजाला महीनों से मुहिम छेड़े हुए है। उसके लिए मैं अमर उजाला परिवार का शुक्रिया अदा करता हूं।
-अरुण कुमार सिंह, शिक्षक, हीरालाल बारहसैनी इंटर कॉलेज
हिंदी भाषा का यह कमाल है कि वह जैसी बोली जाती है, वैसे ही लिखी जाती है। हिंदी भाषा के जरिये अपनी भावनाएं-संवेदनाएं सहज-सरल तरीके से पहुंचाई जा सकती हैं। हिंदी के बढ़ावे के लिए पत्र लेखन, भाषण, वाद-विवाद, कंप्यूटर में हिंदी टाइपिंग की प्रतियोगिताएं होनी चाहिए। इससे हिंदी भाषा व वर्तनी दोनों का विकास होगा।
- शकुंतला अग्रवाल, शिक्षिका विजडम पब्लिक स्कूल
हिंदी की जो दुर्दशा है, उसके लिए हम सब जिम्मेदार हैं। शादी-विवाह या अन्य कार्यक्रमों में हिंदी बोलने में सभी लज्जा का अनुभव करते हैं, जो अनुचित है। हिंदी को लेकर अपनी सोच बदलनी होगी। ऐसा करने में सफल हो गए तो हिंदी भाषा को बढ़ावा मिलना अपने आप शुरू हो जाएगा। एक सकारात्मक प्रयास से हिंदी का स्वरूप बदल जाएगा।
- रेखा रानी, शिक्षिका, राजकीय कन्या इंका कजरौठ
हिंदी को प्रोत्साहन मिलना चाहिए। हिंदी के बढ़ावे के लिए हम सबकी जिम्मेदारी है। हिंदी कोई निरीह भाषा नहीं है। इस पर सबको गर्व करना चाहिए। हिंदी का स्तर ऊंचा उठाने के लिए घर से शुरुआत करनी होगी, क्योंकि मां बच्चे की प्रथम गुरु है। वह बचपन में ही बच्चे में हिंदी के बीज डाल सकती है, जो बाद में वट वृक्ष बन जाएगा।
- सरिता शर्मा, शिक्षिका, रतन प्रेम डीएवी इंटर कॉलेज

रेखा रानी। - फोटो : CITY OFFICE

डॉ दिनेश कुमार शर्मा। - फोटो : CITY OFFICE

सरिता शर्मा। - फोटो : CITY OFFICE

कैप्टन डॉ. अरुण कुमार सिंह।- फोटो : CITY OFFICE

शकुन्तला अग्रवाल।- फोटो : CITY OFFICE

डॉ. ग़ुलाम फ़रीद साबरी।- फोटो : CITY OFFICE

अशोक अंजुम।- फोटो : CITY OFFICE

डॉ संजय कुमार।- फोटो : CITY OFFICE

सरिता शर्मा। - फोटो : CITY OFFICE

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