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किसानों पर शुक्रवार रात हुई आफत की बारिश, महनत पर बरसे ओले

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अतरौली में बारिस और ओले पड़ने से गिरी गेहूं की फसल। - फोटो : CITY OFFICE
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गुरुवार रात हुई बारिश एवं ओलावृष्टि से किसान सांसत में हैं। करीब 20 मिनट तक पड़े ओलों से सरसों एवं आलू की फसल को नुकसान हुआ है। कहीं-कहीं गेहूं के फूल भी गिरने की खबर है। नुकसान के आंकलन के लिए कृषि एवं राजस्व टीमें जुट गई हैं। अब तक मिली जानकारी के अनुसार सर्वाधिक नुकसान कोल तहसील में हुआ है। यहां सरसों एवं आलू की लगभग सात फीसद फसल को क्षति पहुंची है।
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गुरुवार देर रात दो बजे के करीब बारिश के साथ करीब 20 मिनट तक ओले पड़े। इस ओलावृष्टि से किसानों के चेहरों का रंग उड़ गया। विशेष रूप से सरसों एवं आलू उत्पादक किसान खासे परेशान दिखाई दिए। बताते चलें कि इस समय सरसों एवं आलू की फसलें लगभग तैयार हैं और गेहूं के पौधे में भी फूल आ गया है। ओलों से सरसों के पौधे गिर पड़े तो आलू के खेतों में भी पानी भर गया और पौधों को भी क्षति पहुंची। जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि कोल तहसील में सरसों एवं आलू की फसलों को ओलों से नुकसान पहुंचा है।
अभी आंकलन चल रहा है। अन्य तहसीलों में भी इन्हीं फसलों को नुकसान बताया जा रहा है। उन्होंने किसानों को तैयार आलू को जल्द से जल्द खुदवाने एवं तैयार सरसों को काटकर सुरक्षित रखने को कहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि मौसम एक दो दिनों में नहीं खुला तो पानी भरे रहने से आलू की चमक कम हो जाएगी। इससे किसानों को सही दाम नहीं मिलेंगे।
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एएमयू के भूगोल विभाग के चेयरमैन प्रो. अतीक अहमद ने बताया कि 21 मार्च को दिन और रात एक सामान होते हैं। इसके बाद दिन का समय बढ़ेगा और सूरज की किरणें पृथ्वी के सामने वाले भूभाग पर अधिक होंगी, जिससे तापमान बढ़ेगा और धीरे-धीरे गरमी की शुरुआत हो जाएगी। इससे पहले 22 फरवरी से 15 मार्च तक जब-जब तापमान में औसत से अधिक वृद्धि होगी तो इसी तरह से ओलावृष्टि या बारिश होगी जैसे बृहस्पतिवार की रात को हुई है। तापमान बढ़ने और पश्चिमी विक्षोभ के कुछ असर के कारण ऐसा हो रहा है। इस वक्त किसानों को अपनी फसलों को बचाने के उपाय करने चाहिए, जिससे उनका कम से कम नुकसान हो।
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